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बुजुर्गों की आबादी
बुजुर्गों की आबादी|Social media
राज ख़ास

भारत में तेजी से बढ़ रही बुजुर्गों की आबादी

भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है क्योंकि जैसे-जैसे लोगों की आयु बढ़ती है बचत में वृद्धि देखी जाती है लेकिन ज्यादा उम्र होने पर स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि होती है।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस। भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है। समग्रता में भले ही इसका असर आर्थिक एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य में दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है, लेकिन इसका दूरगामी प्रभाव पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि जैसे-जैसे लोगों की आयु बढ़ती है बचत में वृद्धि देखी जाती है लेकिन ज्यादा उम्र होने पर स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि होती है। बचत में कमी आने से राज्यों के घरेलू उत्पादों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

किसी भी देश में बुजुर्गो की संख्या यानी 65 साल से अधिक आयु वाले लोगों की संख्या बढ़ने से बचत में कमी आती है साथ ही साथ श्रम शक्ति में भी गिरावट आती है, जिससे निवेश के प्रतिफल में गिरावट देखी जाती है और निवेश दर भी कम होता है। फिलहाल इस वक्त भारत, अमेरिका व चीन की तुलना में युवा देश है और आगामी दशकों में भी भारत के युवा बने रहने की संभावना है। हमारे अनुमान के अनुसार, वर्ष 2011 में बुजुर्गो की 5.5 फीसदी की आबादी वर्ष 2050 तक बढ़कर 15.2 फीसदी हो जाएगी जबकि वर्ष 2050 में बुजुर्गों की आबादी चीन में 32.6 फीसदी व अमेरिका में 23.2 फीसदी हो जाएगी।