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Lord Dhanvantari (भगवान धन्वन्तरि)
Lord Dhanvantari (भगवान धन्वन्तरि)|Pankaj Baraiya - RE
राज ख़ास

पहले चिकित्सा विज्ञानी धन्वन्तरि

आयुर्वेद के प्रचुर भंडार के बाद भी भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया तेजी से बीमारू हो रही है और हम ऐलोपैथी की तरफ भाग रहे हैं।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस। देवताओं के वैद्य माने जाने वाले भगवान धन्वन्तरि, चिकित्सा के भी देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए भी धनतेरस का विशेष महत्व है। आयुर्वेदिक औषधियों का इसी दिन निर्माण किया जाता है और साथ ही औषधियों को आज के दिन अभिमंत्रित करने का भी प्रचलन है।

समुद्र-मंथन के अंत में आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरि देव व दानवों को अमृत-कलश लिए मिले थे। दरअसल समुद्र मंथन की वैश्विक घटना की जानकारी विश्व के उन सभी दूरांचलों में फैल गई थी, जिनकी सत्ता थी। उस समय धन्वन्तरि चिकित्सा क्षेत्र के बड़े अनुसंधित्सु और वैद्य के रूप में विख्यात हो चुके थे। जिस तरह से समुद्र-मंथन के यात्रियों को विभिन्न देशों में पहुंचने पर कामधेनु गाय, उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा, लक्ष्मी, वारूणी, चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख मिले, उसी प्रकार इस अल्पज्ञात क्षेत्र में धन्वन्तरि मिले। हालांकि धन्वन्तरि जिस औषधीय वन-प्रांतर में रहते थे, उस भू-खंड में उरू, पुरू आदि मूल भारतीय पहले ही पहुंच गए थे। धन्वन्तरि उन्हीं के वंशज थे। धन्वन्तरि और इस क्षेत्र के मुखियाओं को जब देव और असुरों जैसे पराक्रमियों के आने की सूचना मिली, तो वे समझ गए कि इस समूह से किसी भी प्रकार का संघर्ष उचित नहीं है। अपितु इनसे बेहतर संबंध बनाना उचित है। बुद्धिमत्तापूर्ण इस पहल से धन्वन्तरि ने भी समझा होगा कि उनके जो भी औषधीय अनुसंधान हैं, उन्हें वैश्विक मान्यता तो मिलेगी ही, देव व असुरों की चिकित्सा करने का भी अवसर मिलेगा।