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भ्रामक विज्ञापनों पर शिकंजा
भ्रामक विज्ञापनों पर शिकंजा|संपादित तस्वीर
राज ख़ास

भ्रामक विज्ञापनों पर कसेगा शिकंजा

विज्ञापन जगत की सोची-समझी प्रक्रिया है। मगर इस तरह भोली-भाली जनता को मूर्ख तो नहीं बनाया जाता है? अब जबकि सरकार भ्रामक प्रचार से लोगों को बचाने कानून बना रही है।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस, भोपाल। बच्चों और महिलाओं को किसी खास वस्तु की तरफ आकर्षित करने के लिए सितारों को विज्ञापन में लाया जाता है और देखते ही देखते उस उत्पाद की बिक्री बढ़ जाती है। यह विज्ञापन जगत की सोची-समझी प्रक्रिया है। मगर इस तरह भोली-भाली जनता को मूर्ख तो नहीं बनाया जाता है? अब जबकि सरकार भ्रामक प्रचार से लोगों को बचाने कानून बना रही है, तो सितारों को भी जिम्मेदारी समझनी हेगी।

ग्राहकों को अधिक अधिकार देने और उपभोक्ता अदालतों को पहले से ज्यादा मजबूत बनाने संबंधी प्रावधान वाले उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पर लोकसभा ने मुहर लगा दी है। राज्यसभा में इस बिल के पारित होने के बाद उपभोक्ताओं के हित में नया कानून उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 की जगह लेगा। इस बिल में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव है। यह प्राधिकरण अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों को रोकने और ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। यह बिल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि बीते तीन से भी अधिक दशक से बड़ा प्रयास नहीं हुआ है, जबकि इस बीच ऑन लाइन मार्केटिंग समेत व्यापार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। ऐसी परिस्थिति में ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पुराने कानून में बदलाव की जरूरत है। हालांकि, अब सरकार ने इस दिशा में पहल की है।