बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद राज्य में जारी हिंसा पर राज्यपाल की नसीहत
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बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद राज्य में जारी हिंसा पर राज्यपाल की नसीहत

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद से राज्य में जारी हिंसा पर राज्यपाल ओपी धनखड़ को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राजधर्म का पालन करने की नसीहत देना पड़ी है।

अगर कोई यह सोच रहा हो, कि पश्चिम बंगाल में ‘खेला’ खत्म हो गया, तो वह गलत है। अब तक जो कुछ हुआ, वह सिर्फ ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाकी है। बंगाल में पिछले दो माह में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और टीएमसी के बीच जो तल्खी शुरू हुई थी, वह बुधवार को ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण समारोह तक आ पहुंची। यह शायद देश का पहला शपथ ग्रहण समारोह था, जिसमें राज्यपाल को मुख्यमंत्री को बधाई देने के साथ ही लोकतंत्र का पाठ भी सिखाना पड़ा। राज्यपाल की ‘नसीहत’ ने कार्यक्रम में ऐसी तल्खी दिखाई कि सीएम ममता ने भी पलटवार कर सारा ठीकरा चुनाव आयोग और केंद्र पर फोड़ दिया। जब ममता बनर्जी का शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था, ठीक तभी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा कोलकाता में ही बंगाल से राजनीतिक हिंसा को खत्म करने की शपथ अपने चुने हुए विधायकों और नेताओं को दिला रहे थे। दोनों तरफ जो हुआ, उसके मायने गंभीर हैं। राज्यपाल ने नसीहत देकर साफ कर दिया है कि अगर मुख्यमंत्री ने राजधर्म का पालन नहीं किया तो वे बैठे हैं, गलत नहीं होने देंगे, वहीं भाजपा ने शपथ लेकर संदेश देने की कोशिश की है कि टीएमसी के नेताओं की गुंडागर्दी जिस तरह से नतीजे आने के बाद दिखी है, उसके दिन लद चुके हैं।

दरअसल, शपथ ग्रहण के बाद जब राज्यपाल ओपी धनखड़ ने ममता को बधाई देने के लिए माइक संभाला तो कहा कि राज्य में जारी हिंसा तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा-मैं आशा करता हूं कि ममता बनर्जी बंगाल में कानून व्यवस्था के अनुसार शासन करेंगी। उम्मीद है कि ममता संविधान का मान रखते हुए ही काम करेंगी। बंगाल और देश इस वक्त जिस स्थिति में है और लोग परेशान हैं। इन हालात में हमारी प्राथमिकता इस निरर्थक हिंसा को बंद करना है। ये समाज पर बड़े पैमाने पर प्रभाव डाल रही है। जब राज्यपाल सीएम ममता को राजधर्म का पालन करने की नसीहत दे रहे थे, तब दीदी की बॉडी लैंग्वेज देखने लायक थी। राज्यपाल ने अपनी बात खत्म की ही थी कि ममता बनर्जी ने माइक उठा लिया। ममता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में बंगाल की व्यवस्था चुनाव आयोग के हाथ में थी। कानून व्यवस्था चुनाव आयोग के हाथ में थी। मुझे हिंसा के संबंध में खबरें मिली हैं। कुछ दिनों में जो घटनाएं हुई हैं, उसका जिम्मेदार चुनाव आयोग है। हम भरोसा दिलाते हैं कि हम नई व्यवस्था बनाएंगे और बंगाल में किसी भी तरह की हिंसा की घटना नहीं होगी।

जो भी हो, ममता बनर्जी की चुनौतियां अब कहीं ज्यादा बड़ी हैं। राज्य में उनके सामने विपक्ष के रूप में भाजपा होगी। इतना ही नहीं, दूसरे राज्यों की तरह बंगाल में भी कोरोना से हालात बदतर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार और विपक्ष का सारा जोर महामारी से निपटने पर होना चाहिए, न कि राजनीति पर। मगर चुनाव के दौरान जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं, वे राज्य में कई तरह के कड़वे अनुभव लिए हैं। इसलिए आगे क्या-क्या होगा, कहा नहीं जा सकता।

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