हॉर्टिकल्चर हब बनने की तैयारी में मप्र
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राज ख़ास

हॉर्टिकल्चर हब बनने की तैयारी में मध्यप्रदेश

कृषि प्रधान राज्यों की श्रेणी मेें शामिल मध्यप्रदेश अब हॉर्टिकल्चर हब बनने जा रहा है, मध्यप्रदेश सरकार की है यह सार्थक पहल।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से बड़े राज्यों से घिरा हुआ है। महत्वपूर्ण राज्यों से लगभग बराबर दूरी पर स्थित है। इन तथ्यों के मद्देनजर लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से प्रदेश की स्थिति अहम है। मध्यप्रदेश की मौजूदा सरकार का मुख्य एजेंडा किसानों और बेरोजगारों पर केंद्रित है। इस नजरिए से देखें तो उद्यानिकी को बढ़ावा देकर सरकार किसानों की समस्याओं और बेरोजगारी दोनों के समाधान की कोशिश कर रही है।

सिर्फ कृषि उत्पाद की मात्रा में ही नहीं बल्कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी प्रदेश की शोहरत है। मध्य प्रदेश के शरबती गेहूं और गुलाबी चने की पूरे देश में हमेशा से खूब मांग रहती है। लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि, कृषि उत्पाद के वाजिब दाम न मिलने के कारण देश में किसान की माली हालत दिन पर दिन गिरती जा रही है। अब किसान खेती का विकल्प ढूंढ रहे हैं। इसीलिए देश में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की बात हो रही है। मध्यप्रदेश जैसा कृषि प्रधान प्रदेश भी इस चिंता से बचा नहीं है। मध्यप्रदेश में नई सरकार भी किसान समुदाय की बेहतरी के लिए ऐसे उद्यमों की पहचान कर रही है, जो किसानों के लिए माकूल हों। ऐसा ही एक क्षेत्र है उद्यानिकी और उससे जुड़े उद्योग। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश की मौजूदा सरकार का मुख्य एजेंडा किसानों और बेरोजगारों पर केंद्रित है। इस नजरिए से देखें तो उद्यानिकी को बढ़ावा देकर सरकार किसानों की समस्याओं और बेरोजगारी दोनों के समाधान की कोशिश कर रही है।

उद्यानिकी के क्षेत्र में रोजगार के मौके बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण ईकाइयां लगाने के काम को तेज करने के लिए प्रदेश में कई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। बेशक यह अच्छी खबर है। उद्यानिकी पर ज्यादा जोर देना मध्यप्रदेश की आबोहवा के हिसाब से भी माकूल है। इसीलिए प्रदेश में हर तरह के फल, सब्जियां, फूल, औषधीय और सुगंधित फसलों का उत्पादन पहले से हो रहा है। लेकिन इस क्षेत्र को एक उद्योग जैसा महत्व पहले नहीं मिला था जबकि यह वह प्रदेश है जहां आज भी बीस लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें ली जाती हैं। इनमें साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में फल पैदा होते हैं। फलों के अलावा प्रदेश में 9 लाख हेक्टेयर जमीन पर सब्जियां उगाई जाती हैं। यह जिक्र भी कम ही होता है कि, मध्य प्रदेश में सात लाख हेक्टेयर में किसान मसालों की खेती कर रहे हैं। 30 हजार हेक्टेयर जमीन पर फूलों की खेती हो रही है।

प्रदेश की जमीन की विविध गुणवत्ता के कारण ही कोई 50 हजार हेक्टेयर जमीन पर औषधीय पौधे लगाए जाते हैं। ये वह महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिनके आधार पर मप्र को बहुत पहले ही बागवानी का वैश्विक केंद्र बनाया जा सकता था। बहरहाल देर से ही सही लेकिन अब कमलनाथ सरकार द्वारा इस दिशा में पहल होती नजर आ रही है। प्रदेश में क्षमताओं व संभावनाओं को और ज्यादा बारीकी से देखें तो प्रदेश में संतरा, आम, अमरूद, केला वगैरह अच्छी मात्रा में पैदा किए जाते हैं वहीं सब्जियों में मटर, टमाटर, प्याज और आलू भरपूर पैदा हो रहे हैं। यहां धनिया, मिर्च और लहसुन जैसे मसालों का भी खूब उत्पादन होता है। अब तक बस कमी रही तो यह कि इन उत्पादों के लिए अच्छे बाजार पर ढूंढने पर ज्यादा ध्यान नहीं गया। ये तथ्य यह समझने के लिए काफी हैं कि प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने उद्यानिकी पर अलग से ध्यान लगाने की बात क्यों सोची। इतना ही नहीं इस सोच को अमल में लाना भी शुरू हो चुका है। हाल ही में एक करार हुआ है जिसके तहत विश्व प्रसिद्ध कोकाकोला कंपनी मध्य प्रदेश से तोतापरी आम खरीदेगा। इसके लिए होशंगाबाद, हरदा और बैतूल में 1000 एकड़ में प्रदेश के मशहूर आम पैदा किए जाएंगे। यानी खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कमलनाथ सरकार ने अपने इरादों को जाहिर कर दिया है।

नाथ सरकार बागवानी को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर किस्म के ज्ञान-विज्ञान प्रौद्योगिकी का सहारा ले रही है। इसीलिए सरकार इजराइल के साथ मिलकर संतरे, नीबू आदि के उत्पादन के लिए एक उत्कृष्ट संस्थान छिंदवाड़ा में स्थापित करने जा रही है। इसी तरह फूलों की सलीके से खेती के लिए भी इजराइल के सहयोग से भोपाल में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार सिर्फ अपने बूते भी दो हॉर्टिकल्चर और फ्लोरीकल्चर हब बना रही है। हॉर्टिकल्चर हब होशंगाबाद के बाबई में बनाया जाना तय हुआ है। इसके लिए 120 एकड़ जमीन को चिन्हित करने का काम पूरा हो चुका है। फ्लोरीकल्चर के लिए छिंदवाड़ा में सौ एकड़ जमीन को इस्तेमाल करने की योजना है। इसी जगह एक विश्व-स्तरीय हॉर्टिकल्चर ट्रेनिंग सेंटर बनाने की भी योजना तैयार है जहां किसानों और अफसरों को प्रशिक्षण देने का काम किया जाएगा। कुल मिलाकर कमलनाथ सरकार जिस शिद्दत से उद्यानिकी को बढ़ावा में लगी दिख रही है उससे लगता है कि प्रदेश उद्यानिकी का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। सरकार ने भले ही रोजगार बढ़ाने के मकसद से यह क्षेत्र तलाशा हो, लेकिन इससे कृषि प्रधान इस प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य में बदलाव की भी उम्मीद लगाई जा सकती है।

उद्यानिकी के क्षेत्र को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार की सोच पर सवाल भले ही नहीं उठाए जा सकते हों लेकिन इस काम के लिए सरकार के सामने चुनौतियां भी कुछ कम नहीं हैं। हालांकि गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादों के लिए पहले से मशहूर है लेकिन ज्यादा प्रचारित भले न हो, वह आम और टमाटर जैसे उद्यानिकी उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है। यानी इस क्षेत्र में भी मप्र इस शोहरत का फायदा उठा सकता है। कम से कम खाद्य उत्पादों की देशव्यापी ब्रांडिंग में मप्र के सामने ज्यादा समस्या नहीं आएगी, लेकिन इस तथ्य को भी ध्यान में रखना जरूरी है कि ब्रांडिंग खुद में एक पेशेवर काम है। व्यापार जगत में ब्रांडिंग को एक उद्योग का दर्जा हासिल है। निजी क्षेत्र इस काम में खासी दिलचस्पी लेता है। लेकिन कृषि या बागवानी के उत्पादों में निजी क्षेत्र उतनी दिलचस्पी लेगा, इस बात में संशय है। यहीं पर सरकारी क्षेत्र की भूमिका अहम हो जाती है।

प्रदेश सरकार जिस तरह से दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के लिए निवेशकों को आकर्षित कर रही है, वैसी ही और उतनी कोशिशें अगर उद्यानिकी के लिए हों तो वे सारे कारण पहले से मौजूद हैं जिनसे मध्यप्रदेश विश्व का एक हॉर्टिकल्चर हब बन सकता है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी कहा है कि मप्र सभी राज्यों से भिन्न है। ये प्राकृतिक और लॉजिस्टिक रूप से उद्योगों के लिए काफी अनुकूल है। इंदौर में देश-विदेश से आए निवेशक मध्यप्रदेश की विशेषताओं व उद्योगों के अनुकूल नीतियों को जानकर काफी आशान्वित हुए हैं। मेरा विश्वास है कि अब मध्यप्रदेश का निवेश इतिहास बदल जाएगा। प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। यहां सस्ती जमीन, बिजली तथा पानी सहित अन्य आधारभूत सुविधाएं हैं। प्रदेश में प्रसंस्करित खाद्य पदार्थो के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक मांग के अनुरूप गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए कृषकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश में सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती 300 एकड़ भूमि पर की जा रही है। अगले वर्ष 2000 एकड़ में इनके उत्पादन का लक्ष्य है।

प्रदेश में पैकेज्ड फूड में व्यापक अवसर है। मसाला उद्योग, डिहाइड्रेड ऑनियन, टमाटर प्यूरी, फलों के जूस आदि उद्योगों के अनुकूल व्यवस्थाएं हैं। प्रदेश सरकार की निवेश संवर्धक नीति और कागजी कार्यवाही में समय की बचत, निवेशकों को आकर्षित कर रही है। भारत का 40 प्रतिशत ऑर्गेनिक उत्पाद मध्यप्रदेश में होता है। मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति इसे लॉजिस्टिक हब के लिये एकदम उपयुक्त बनाती है। यही कारण है कि राज्य सरकार चुनिंदा जगहों पर ऐसे हब बनाने के संबंध में गंभीर है।

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