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राजनीति को सकारात्मक मोड़ देना जरूरी
राजनीति को सकारात्मक मोड़ देना जरूरी|Pankaj Baraiya - RE
राज ख़ास

राजनीति को सकारात्मक मोड़ देना जरूरी

केवल सतही सोच के आधार पर देश के विकास को तीव्र गति प्रदान करने विषयक ना तो नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं और ना ही प्रगति की रफ्तार को तेज किया जा सकता है।

राजेंद्र बज

राज एक्सप्रेसः इन दिनों देश के राजनीतिक परिदृश्य में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर दलीय हित भारी पड़ रहे हैं। देश की राजनीति में उथली सोच का निर्लज्ज प्रदर्शन हो रहा है। निरंतर परिवर्तित परिवेश में विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने हेतु देश की दशा और दिशा को सुव्यवस्थित आकार देती कार्ययोजनाएं अधिकांश राजनीतिक दलों के पास नहीं हैं। केवल सतही सोच के आधार पर देश के विकास को तीव्र गति प्रदान करने विषयक ना तो नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं और ना ही प्रगति की रफ्तार को तेज किया जा सकता है। दूरगामी सोच का अधिकांश राजनीतिक दलों में अभाव गहन चिंता का विषय है। तथाकथित विकास के नाम पर देश की प्रकृति पर विशेष गौर करना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है।

लोकतंत्र की सार्थकता तब ही सुरक्षित हो सकती है जबकि सत्ता को जनहित का साधन माना जाए। लेकिन वर्तमान दौर की राजनीति में सत्ता को साध्य मान लिया गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच एक अजीब सी प्रतिस्पर्धा चल रही है जिसमें नागरिकों को बैठे-ठाले सब्जबाग दिखाकर सत्ता हथियाने की तमाम कोशिशें बदस्तूर जारी हैं। विगत चार-पांच वर्षों में देश के गौरव की प्रतीक उपलब्धि-दर-उपलब्धि को भी संदेह के दायरे में लाकर राजनीतिक स्वार्थसिद्धि की कोशिशें भी परवान चढ़ रही है। प्रतिपक्षी दलों का आत्मधर्म महज नेतृत्व की आलोचना करना ही रह गया है। वास्तविकता को नजरअंदाज करके प्रगति के शिखर पर पहुंचना और टिके रहना दुष्कर होता है। लेकिन यथार्थवादी सोच के साथ विकास की दिशा में तीव्र गति से बढ़ते कदम निश्चित रूप से मुल्क के मालिकों अर्थात आम नागरिकों के संज्ञान में ही रहते हैं। ऐसे में भ्रम पर आधारित राजनीति का कतई कोई भविष्य नहीं होता।