भारत-चीन सीमा विवाद
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राज ख़ास

भारत-चीन सीमा विवाद: कूटनीतिक वार्ता के बावजूद लद्दाख में जारी सीमा तनाव

भारत-चीन सीमा विवाद : 14 जुलाई को शीर्ष भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों ने अपनी सेनाओं के पीछे हटने व नक्शे पर चर्चा करने को लेकर बातचीत की थी।

राज एक्सप्रेस

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भारत-चीन सीमा विवाद : भारत और चीन गहन सैन्य और कूटनीतिक वार्ता के बावजूद लद्दाख क्षेत्र में जारी सीमा तनाव को कम नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा के कुछ बिंदुओं पर सेना के पीछे हटने की प्रक्रिया लगभग रुकी है। यह गतिरोध तब है जब 14 जुलाई को शीर्ष भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों ने अपनी सेनाओं के पीछे हटने और नक्शे पर चर्चा करने को लेकर बातचीत की है। क्षेत्र में जमीनी स्थिति अपरिवर्तित बनी है, जहां दोनों सेनाओं ने अपने फॉरवर्ड व गहराई वाले क्षेत्रों में लगभग एक लाख सैनिकों को रोक रखा है। पैंगोंग त्सो और डेपसांग सहित एलएसी के साथ गतिरोध वाले क्षेत्रों में सैनिकों के पीछे हटने को लेकर कोई फॉरवर्ड मूवमेंट नहीं हुआ है। पूरी तरह से गतिरोध को खत्म करने में लंबा समय लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति जटिल है और कोई इसमें कोई त्वरित सुधार नहीं हो सकता। चीनी यथास्थिति से खुश होंगे क्योंकि वे पहले से भारतीय क्षेत्र में बैठे हुए हैं। सरकार को अब यह सोचने की जरूरत है कि गतिरोध खत्म करने के लिए अब आगे क्या करना है।

हालांकि भारत अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियों को पुख्ता करने में जुटा हुआ है। चीन के धोखे के इतिहास को देखते हुए भारत लद्दाख में लंबे समय तक टिके रहने के लिए अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रहा है। भारत की तैयारियों का जायजा का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सर्दियों में बंद रहने वाला जोजिला पास पर भी जोरदार तरीके से काम चल रहा है। चीन और भारत के बीच सीमा पर तनाव भले ही कम होता नजर आया हो लेकिन अभी यह पूरी तरह टला नहीं है। चीनी सेना वादे के बावजूद भी अभी पूरी तरह पीछे नहीं हटी है। ऐसे में भारतीय सेना भी कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। वह लद्दाख जैसे मुश्किल हालात में टिके रहने के लिए अपनी तैयारियों को और पुख्ता करने में जुटी है। यह भी सही है भूखे पेट कोई सेना जंग नहीं लड़ सकती। लेकिन असल बात यह है कि सेना को लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले माहौल में रहने के लिए खास माहौल के लिए खास कपड़े, शेल्टर, आर्कटिक टैंट, ईंधन और अन्य कई तरह के सामान की जरूरत होती है। सेना ने अपने जवानों के लिए पर्याप्त मात्रा में राशन और अन्य सप्लाई मुहैया कराने के लिए एक्सरसाइज शुरू कर दी है।

अग्रिम मोर्चों पर बर्फबारी और सर्दियां शुरू होने से पहले सप्लाई मुहैया कराने के लिए योजना बनाने, उसका क्रियान्वन करने और सप्लाई के लिए ट्रांसपोर्टेशन का इंतजाम करने के लिए हर साल होने वाली एक लंबी प्रक्रिया है। इस बार चुनौती अधिक है। मई की शुरुआत से चीन के साथ सीमा पर तनातनी के बीच सामान्य से तिगुने से ज्यादा जवान इस इलाके में तैनात हैं। कई जवान बहुत ऊंचे इलाकों में हैं। इनमें से अधिकतर तो 15000 फीट की ऊंचाई पर हैं। अब जो समय है, उसमें और आक्रामकता अपनाने की जरूरत है।

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