तेजी से विकसित हो रहे 'बांग्लादेश' के लिए भारत का महत्व सर्वाधिक
तेजी से विकसित हो रहे 'बांग्लादेश' के लिए भारत का महत्व सर्वाधिकSocial Media

तेजी से विकसित हो रहे 'बांग्लादेश' के लिए भारत का महत्व सर्वाधिक

महामारी की पृष्ठभूमि में पहले विदेश दौरे के रूप में बांग्लादेश को चुनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संदेश दिया कि रिश्ते में भारत संजीदगी बरतेगा।

अपनी आजादी की स्वर्ण जयंती व बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी के समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाकर मुजीबर रहमान की बेटी तथा प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कई मोर्चे पर अर्थपूर्ण संदेश दिए। एक महत्वपूर्ण संदेश यह था कि तेजी से विकसित हो रहे बांग्लादेश के लिए भारत का महत्व सर्वाधिक है और बांग्लादेश की स्वतंत्रता में भारत का निर्णायक योगदान रहा है, भले ही वहां के कट्टरवादी भारत-विरोधी राग अलाप रहे हों। शेख हसीना के इस फैसले से यह भी पता चलता है कि 2026 तक बांग्लादेश ने अल्प विकसित देशों की सूची से खुद को बाहर निकालने का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल करने के लिए भारत के साथ व्यापार एवं पारगमन साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, महामारी की पृष्ठभूमि में पहले विदेश दौरे के रूप में बांग्लादेश को चुनकर नरेंद्र मोदी ने भी संदेश दिया कि बांग्लादेश के साथ रिश्ते में भारत पूरी संजीदगी बरतेगा। बांग्लादेश से पाकिस्तान यह सबक जरूर सीख सकता है कि अतीत के बजाय वह भविष्य पर निगाह रखे।

भारत कीने बरहुड फर्स्ट एट ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत-बांग्लादेश रिश्ते और मजबूत हुए हैं। कोरोना काल में भारत की वैसीन मैत्री के तहत सबसे ज्यादा वैक्सीन बांग्लादेश को मिली है। बांग्लादेश को मिले 90 लाख वैसीन डोज में 20 लाख डोज ग्रांट के तौर पर है। दिसंबर 2020 में पीएम मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने पश्चिम बंगाल के हल्दीबाड़ी और बांग्लादेश के चिलाहाटी के बीच 55 साल बाद रेल लिंक को हरी झंडी दिखाई थी। ये रेल लिंक 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में टूटा था, जो 2020 के अंत में जुड़ गया। दिसंबर 2020 में शेख हसीना के साथ वर्चुअल समिट में ही पीएम मोदी ने अपने बांग्लादेश दौरे की घोषणा की थी। पचास साल में भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्ते उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। पर नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय बांग्लादेश दौरे ने इन दो देशों के संबंधों को दक्षिण एशिया के आदर्श द्विपक्षीय रिश्तों के तौर पर परिभाषित कर दिया है।

सालभर पहले जब कोरोना शुरू हुआ था तब रिश्तों में थोड़ी सी खटास की खबरें थी। बांग्लादेश के मंत्रियों ने भारत का दौरा रद्द कर दिया था। भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने सीएए को लेकर संसद में बयान दिया जिसमें बांग्लादेश घुसपैठियों का भी जिक्र किया था। विपक्ष पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाया था। तो साल भर में क्या बदला? आजादी के बाद से भारत के साथ दोस्ताना रखने वाला बांग्लादेश पिछले साल नाराज क्यों हो गया था? और क्यों अब भारत बांग्लादेश से संबंध सुधारने में लगा है? प्रधानमंत्री मोदी की बांग्लादेश यात्रा के निहितार्थ क्या हैं? भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिहाज से भी और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के हिसाब से भी।

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