छत्तीसगढ़ : 700 जवानों को घेरकर नक्सलियों ने तीन घंटे गोलियां चलाईं
छत्तीसगढ़ : 700 जवानों को घेरकर नक्सलियों ने तीन घंटे गोलियां चलाईंSocial Media

छत्तीसगढ़ : 700 जवानों को घेरकर नक्सलियों ने तीन घंटे गोलियां चलाईं

छत्तीसगढ़ में 10 दिन के अंदर दूसरा नक्सली हमला हुआ है। नक्सलियों का यह दुस्साहस स्वीकार नहीं है। विकास के खिलाफ सोच की परिणति हिंसा कतई नहीं हो सकती।

छत्तीसगढ़ में 10 दिन के अंदर दूसरा नक्सली हमला हुआ है। इससे पहले 23 मार्च को हुए हमले में भी पांच जवान शहीद हुए थे। यह हमला नक्सलियों ने नारायणपुर में आईईडी लास्ट के जरिए किया था। अब एक बार फिर नक्सलियों ने अपनी ताकत से सभी को रूबरू कराया है। शनिवार तक हमले में पांच जवानों के शहीद होने की खबर थी, मगर अब संख्या बढ़ती जा रही है। जिस इलाके में मुठभेड़ हुई है, वह नक्सलियों की फर्स्ट बटालियन का कार्यक्षेत्र है। 20 दिन पहले यूएवी की तस्वीरों से यहां बड़ी संख्या में नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। बीजापुर में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 24 जवानों की शहादत ऑपरेशनल प्लानिंग की नाकामी की ओर इशारा कर रही है। 700 जवानों को घेरकर नक्सलियों ने तीन घंटे गोलियां चलाईं। 24 घंटे बाद जवानों के शव लेने के लिए रेस्यू टीम नहीं पहुंच सकी। सीआरपीएफ के एडीडीपी ऑपरेशंस जुल्फिकार हंसमुख, वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार व सीआरपीएफ के पूर्व डीजीपी विजय कुमार और मौजूदा आईजी ऑपरेशंस नलिन प्रभात 20 दिनों से जगदलपुर, रायपुर व बीजापुर के क्षेत्रों खुद मौजूद हैं।

इन अफसरों के वहां रहने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में जवानों का शहीद होना पूरी ऑपरेशनल प्लानिंग पर सवाल खड़े कर रहा है। ध्यान देने वाला एक और तथ्य है। मौजूदा आईजी ऑपरेशंस नलिन कुमार डीआईजी रह चुके हैं। 2006 में उनके कार्यकाल में हुए नक्सली हमले में 76 जवान शहीद हुए थे। अभी जवानों की शहादत व प्लानिंग पर सवाल उठाना सही नहीं है। अभी जरूरत नक्सलियों की इस करतूत को मुंहतोड़ जवाब देने की है, ताकि अगली बार वे ऐसा कुछ करने के बारे में दस बार सोचें। नक्सली हिंसा से कई दशक तक जूझने के बाद भी सरकारें नक्सल नीति की दिशा तय करने की चुनौतियों से जूझ रही हैं। यह अभी भी साफ नहीं हो पाया है कि नक्सलवाद की समस्या का समाधान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रयासों में है या फिर कानून और व्यवस्था से जुड़ा मामला है। नक्सलवाद के अंतर्गत आने वाले लाल गलियारे की हिंसा पिछले पांच दशकों से जारी है।

देश के 21 राज्यों के लगभग ढाई सौ जिलों को प्रभावित करने वाला नक्सलियों का यह इलाका आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इन इलाकों में अपहरण, फिरौती, डकैती, बम विस्फोट, निर्ममता से हत्याएं, अवैध वसूली और विकास को बाधित करने की कोशिशें, लोकतांत्रिक सत्ता को उखाड़ फेंकने की इच्छा और समांतर सरकार चलाने की हिमाकतें होती रही हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बने नक्सलियों को राज्य और केंद्र सरकारें असर चुका हुआ घोषित करने की गलती करते रही हैं और हमेशा इसका जवाब बेहद कायराना मिलता रहा है। मगर अब अतीत से सबक लेकर आगे बढऩा ही होगा।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

No stories found.
Top Hindi News,Trending, Latest viral news,Breaking News - Raj Express
www.rajexpress.co