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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)|Syed Dabeer Hussain - RE
राज ख़ास

आतंक के ढांचे को तोड़ना जरूरी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी को नए संशोधन द्वारा बढ़ाया गया अधिकार, कार्यक्षेत्र और भौगोलिक सीमा विस्तार वास्तव में आतंकवाद की छानबीन व कानूनी कार्रवाई करने वाली शीर्ष एजेंसी को सशक्त करने का ही कदम है।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस, भोपाल। पूर्वाग्रह के आधार पर कठोर व्यवहार और कानूनी कार्रवाई से परहेज किया जाए। अधिकार संपन्न एजेंसी से ऐसे ही व्यवहार की अपेक्षा की जाएगी।

भारत वैश्विक आतंक के रडार पर है यह जाना माना तथ्य है। आतंकवाद का सामना करने के लिए देश के पास सांस्थानिक, कानूनी और न्यायिक..हर तरह का सशक्त ढांचा होना चाहिए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी या कहें एनआईए को नए संशोधन द्वारा बढ़ाया गया अधिकार, कार्यक्षेत्र और भौगोलिक सीमा विस्तार वास्तव में आतंकवाद की छानबीन व कानूनी कार्रवाई करने वाली शीर्ष एजेंसी को सशक्त करने का ही कदम है। 31 दिसंबर 2008 को अस्तित्व में आई एनआईए एक संघीय जांच एजेंसी है जो संसद द्वारा दिए गए अधिकारों तथा गैर कानूनी गतिविधियां निवारक कानून के तहत काम करती है। किंतु इसकी सीमाएं भी थीं। मसलन, यह भारतीय सीमा के अंदर ही छानबीन एवं कार्रवाई कर सकती थी। दूसरे, इसके लिए स्थापित विशेष न्यायालयों में भी समस्याएं थीं जिनसे मामला निपटाने में देर होती थी। तीसरे, हाल के वर्षो में मानव तस्करी और साइबर अपराधों में जितनी तेजी से बढ़ोतरी हुई है उनसे निपटने के लिए हमारे पास दूसरी एजेंसी नहीं है। आतंकवाद का संबंध इनसे भी है। जाहिर है, इनके लिए संशोधन की जरूरत थी एवं संसद ने पारित कर दिया।

हमारे देश की समस्या है कि आतंकवादी यदि हमला कर दें तो उसमें सुरक्षा विफलता पर पूरा हंगामा होगा, पकड़े गए आतंकवादियों को सजा मिलने में देर हुई तो फिर एजेंसी एवं न्यायिक प्रक्रिया की आलोचना होगी, कोई आतंकी यदि पकड़ में नहीं आ रहा तो एजेंसी की मिट्टी पलीद कर दी जाएगी, मगर जब आप एजेंसी को शक्ति संपन्न बनाने की कोशिश करेंगे तो उसकी तीखी आलोचना होगी। यही एनआईए के संदर्भ में भी हुआ। संसद से बाहर तक हंगामा और विरोध जो अभी भी जारी है। पहले यह देखें कि एनआईए पहले से ज्यादा शक्ति संपन्न कैसे हुआ और आगे कितना शक्ति संपन्न होने की संभावना है? नए प्रावधान में एनआईए को भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के संबंध में मामले का पंजीकरण करने और जांच का अधिकार मिल गया है। वह अब विदेशों में भारतीय एवं भारतीय परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों की जांच कर सकेगी जिसे आतंकवाद का निशाना बनाया गया हो।