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देश छोड़ने की पीड़ा त्रासदी भरी
देश छोड़ने की पीड़ा त्रासदी भरी|Pankaj Baraiya - RE
राज ख़ास

देश छोड़ने की पीड़ा! त्रासदी भरी

क्यों रोजगार की तलाश में प्रवासी लोग देश छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं? ऐसे क्या कारण हैं जो अवैध रूप से रोजगार तलाशने को मजबूर करते है?

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस। विकसित देशों में जो प्रवासी आज मौजूद हैं, उनका यदि सर्वेक्षण किया जाए तो पता चलेगा कि कितने प्रवासी शरणार्थी हैं और कितने अवैध तरीके से वहां रह रहे हैं। लेकिन वास्तविकता में यदि पहचान करने की नौबत आती है तो वे शीघ्र अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पार करने में देरी नहीं करते। जो शरणार्थी हैं, उन्हें तो अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार रहने की अनुमति मिल सकती है, पर जो सीमाओं को चोरी-छिपे लांघ कर वहां पहुंचे हैं, उन्हें उस देश से शीघ्र भगाया जा सकता है, उन्हें वहां कोई वीजा नहीं दिया जा सकता।

रोजगार की तलाश में लोग देश छोड़ने तक को मजबूर हो जाते हैं। इनमें कुशल कारीगर, मजदूर तो होते ही हैं, साथ ही अपने क्षेत्र के पारंपरिक विशेषज्ञ भी होते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपने काम और कौशल को आगे बढ़ाते हैं, पर साधनों के अभाव में देश में न रुक कर दूसरे मुल्कों का रास्ता तलाशते हैं। कुछ लोग वे हैं जो इंजीनियरिंग, डॉक्टरी, प्रबंधन की शिक्षा के लिए बैंकों से लिए कर्ज को लौटाने के लिए जल्दी रोजगार ढूंढने की कोशिश करते हैं। उन्हें यदि देश में रोजगार नहीं मिलता तो उनके पास एक ही चारा बचता है कि देश से बाहर निकला जाए। जहां वे अपनी शिक्षा का भरपूर उपयोग करने की इच्छा रखते हैं। जब बाहर जाने में उन्हें वीजा की जरूरत होती है, तब कोई वैधानिक रास्ता न मिलने के कारण वे गैरकानूनी तरीके अपनाते हैं और दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं। ऐसे हजारों मामले लगातार सामने आते रहे हैं। बहुत से तो दूसरे देशों में पहुंचने में कामयाब हो जाते हैं। एक बार वे किसी तरह उस देश में घुस जाएं, जहां रोजगार की संभावना है तो किसी न किसी तरह वे उस देश में जुगाड़ कर ही लेते हैं। बहुत से ऐसे उदाहरण हैं जो किसी न किसी बहाने चोरी-छिपे दूसरे देश में पहुंचे और फिर वहीं के हो गए। भारतीय नागरिकों के लिए कनाडा भी एक ऐसा ठिकाना रहा है, जहां वे रोजगार की तलाश में पहुंचे हैं और वहीं बस गए हैं।