आतंकवाद पर पाक फिर बेपर्दा
आतंकवाद पर पाक फिर बेपर्दा|Social Media
राज ख़ास

आतंकवाद पर पाक फिर बेपर्दा

आतंकवाद को पालने और पोसने वाले पाकिस्तान से उसके पड़ोसी मुल्क ही नहीं बल्कि खुद वो भी परेशान है।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस। आतंकवाद को पालने और पोसने वाले पाकिस्तान से उसके पड़ोसी मुल्क ही नहीं बल्कि खुद वो भी परेशान है। हर साल पाक में सैकड़ों आम लोग और सुरक्षाबल, आतंकवाद के कारण जान गंवा देते हैं। बावजूद इसके न तो वह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और न ही आतंकवाद की मौजूदगी को स्वीकार कर रहा है। मगर अब जिंदा पकड़े गए लश्कर के एक आतंकी ने पाक की पोल खोल दी है कि, कैसे वह प्रशिक्षण लेकर भारत में दहशतगर्दी को बढ़ावा देने आया था।

आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान खुद को कितना भी पाक-साफ साबित कर ले, मगर उसकी पोल खुल ही जाती है। इमरान सरकार आने के बाद या उससे पहले की सरकारों का रवैया आतंकवाद को पालने और दुनियाभर के सामने बेचारा बने रहने का था। एक भी सरकार ने यह स्वीकार करने की हिम्मत नहीं दिखाई कि उसकी नीतियों ने ही देश में आतंकवाद को जन्म दिया, जो भारत समेत पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिए है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की पाकिस्तान के खिलाफ की गई सख्ती से लेकर भारत द्वारा की गयी पहले सर्जिकल और फिर एयर स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान यही साबित करने में लगा रहा कि, उसकी धरती पर आतंकवाद की फैक्ट्री नहीं है। भारत जिन स्थानों की बात कर रहा है, वह मदरसे हैं, जहां पर बच्चों को तालीम दी जाती है। अपना दामन साफ रखने पाकिस्तान जितने जतन कर रहा है, उससे थोड़ा भी कम वह भारत के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में साथ देता तो न सिर्फ खुद की स्थिति सुधार लेता, बल्कि विश्व समुदाय का साथ भी हासिल कर सकता था।

बहरहाल, कश्मीर में जिंदा पकड़े गए एक आतंकी के बयानों से एक बार फिर पाकिस्तान की पोल खुली है। गिरफ्तार आतंकवादी का ताल्लुक लश्कर-ए-तैयबा से है। आतंकी इश्फाक अहमद डार पुलवामा जिले के डंगरपोरा पडामपोरा का रहने वाला है। उसने स्वीकार किया है कि मुजफ्फराबाद में चार महीने का प्रशिक्षण लेने के बाद वह कश्मीर घाटी में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के मकसद से आया था। उसके बयानों से यह भी जाहिर हुआ कि पाकिस्तान में चल रहे आतंकवादी शिविरों में किस तरह युवाओं को बरगला कर आतंक के रास्ते पर चलने को उकसाया जाता है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब कोई जिंदा आतंकी पकड़ा गया है। इससे पहले भी कई आतंकवादियों को जिंदा पकड़ कर उनके बयान दर्ज किए गए हैं और पाकिस्तानी हुकूमत को सौंपे जा चुके हैं। मगर हर बार पाक या तो उन्हें अपना नागरिक मानने से इंकार करता रहा है या उनके अपने यहां किसी शिविर में प्रशिक्षण लेने को सिरे से खारिज करता रहा है।

किसी आतंकी को जिंदा पकड़ना सुरक्षा बलों के लिए इसलिए भी अहम होता है कि उसके जरिए अनेक घटनाओं के सूत्र तलाशने, आतंकी साजिशों को समझने में बड़ी मदद मिलती है। फिर जिस तरह घटनास्थलों से जुटाए सबूतों को साबित करना बेहद कठिन होता है, उस तरह जिंदा आतंकी के बारे में मशक्कत नहीं करनी पड़ती है। वह खुद गवाह होता है और जरूरत पड़ने पर उसे अंतरराष्ट्रीय अदालत के समक्ष पेश किया जा सकता है। ताजा मामले में पकड़े गए अवान नाम के आतंकवादी ने स्वीकार किया है कि वह पाक में प्रशिक्षण लेने गया था और आतंकवादियों की सहायता कर रहा था। इस तरह पाकिस्तान के लिए उसके बयानों को झुठलाना आसान नहीं होगा। उसकी पूरी वल्दियत की जांच संभव है। हालांकि मुंबई हमले में पकड़े गए अमीर अजमल कसाब के मामले में भी उसकी पूरी वल्दियत की तहकीकात हो चुकी थी। यहां तक कि उसके पास से बरामद साजो-सामान भी इस बात के पुख्ता प्रमाण थे कि उसे सीमा पार से प्रशिक्षित कर दहशत फैलाने की नीयत से भेजा गया था।

पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़ी अनेक बातें उसने बताई थीं। मगर पाकिस्तान सिरे से इस बात को खारिज करता रहा कि वह उसके देश का नागरिक है। इसी तरह वह अन्य पकड़े गए दहशतगर्दो के मामले में करता रहा है। आतंकवाद को पालने और पोसने वाले पाकिस्तान से उसके पड़ोसी मुल्क ही नहीं बल्कि खुद वो भी परेशान है। हर साल पाक में सैकड़ों आम लोग और सुरक्षाबल आतंकवाद से अपनी जान गंवा देते हैं। पाकिस्तान में बीते कुछ सालों से आतंकवादी घटनाओं में गिरावट जरूर आई है लेकिन बावजूद इसके बीते पांच सालों में 3519 आतंकी घटनाएं हुईं। इनमें सुसाइड हमले की संख्या 137 रही। बीते पांच सालों में हुए आतंकी हमलों में पाकिस्तान ने अपने कुल 3698 सुरक्षा बलों की जान गंवाई, जबकि आम आदमी की बात करें तो 1533 लोगों ने इस दौरान अपनी जान गंवाई। यह वह आंकड़ा है, जो सरकार ने जारी किया है। इससे कहीं ज्यादा मरने वालों का आंकड़ा है। अपने लोगों के लिए ही नासूर बन चुका आतंकवाद भी पाकिस्तान सरकार को नहीं दिख रहा है। तो फिर उसे दूसरे देशों की हालात क्यों दिखेगी। आतंकवाद को लेकर पाक की नीयत में जब तक खोट रहेगा, तब तक उसे न तो कार्रवाई की सुध आएगी और न ही वह विश्व समुदाय की लड़ाई में भागीदार बन पाएगा।

आतंकवादियों की शरणस्थली बना पाकिस्तान अभी कुछ दिनों पहले ही अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने बेनकाब हो गया था। एक वीडियो फुटेज में पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान की कैबिनेट के सहयोगी मंत्री नूर-उल-हक कादरी आतंकी हाफिज सईद के साथ एक मंच साझा करते हुए दिखाई दिए थे। इसके बाद यह साफ हो गया था कि पाकिस्तान बेशर्मी के साथ न सिर्फ दुनियाभर के आतंकवादियों को शरण दे रहा है बल्कि बार-बार झूठ भी बोल रहा है। भारत ने अब तक पाकिस्तान को जितने भी सबूत दिए हैं, उन सभी को वह झूठा साबित कर चुका है। मुंबई में हमले के समय जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब को लेकर भारत ने जो-जो सबूत दिए थे, वह सब आज भी उसकी फाइलों में कैद हैं, जबकि पाकिस्तान मीडिया खुद कसाब के गांव तक पहुंच चुका है।

आतंकवाद पर दोहरा रवैया जताने के चलते ही पाक को अमेरिका झटके पर झटका दे रहा है। अब तक अमेरिका ने पाकिस्तान की अरबों रुपए की सहायता पर रोक लगाई है और लगातार सुधर जाने की बात कह रहा है। चीन को छोड़ दुनिया का एक भी मुल्क आज पाकिस्तान के साथ नहीं है। बावजूद इसके पाकिस्तान अपना हठ छोड़ने से बाज नहीं आ रहा है। इमरान सरकार आने के बाद भारत समेत पूरी दुनिया ने बदलाव की उम्मीद जताई थी, मगर वह भी समय के साथ धूमिल होती जा रही है।

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