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संसद ने पेश की नई नजीर
संसद ने पेश की नई नजीर|Syed Dabeer Hussain - RE
राज ख़ास

संसद ने पेश की नई नजीर

संसद के बजट सत्र ने देश के सामने ऐसी नजीर पेश की है, जो जनप्रतिनिधियों के प्रति जनमानस में बन चुके माहौल को दूर करने में मददगार साबित होगा।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस, भोपाल। संसद के बजट सत्र ने देश के सामने ऐसी नजीर पेश की है, जो जनप्रतिनिधियों के प्रति जनमानस में बन चुके माहौल को दूर करने में मददगार साबित होगा। इस बार के सत्र में जिस तरह से काम हुआ व जैसा माहौल बना, वह आगे भी बरकरार रहना चाहिए।

संसद सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया और इस सत्र के दौरान तीन तलाक संबधित विधेयक तथा जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के प्रावधान सहित कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया। सभापति एम वेंकैया नायडू ने उच्च सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारपंरिक संबोधन में कहा कि, पिछले 17 साल में सबसे अधिक विधायी कामकाज तथा सबसे अधिक बैठकें इस सत्र में हुईं। लोकसभा चुनाव के बाद राज्यसभा का यह पहला सत्र था और इस दौरान 2019-20 का आम बजट, राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव, तीन तलाक विधेयक, आरटीआई कानून में संशोधन संबंधी विधेयक, अनुच्छेद 370 की अधिकतर धाराओं को समाप्त करने संबंधी संकल्प, जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक समेत कुल 35 विधेयक पारित किए गए। सत्र के दौरान जहां कई नए सदस्यों ने उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली वहीं सपा और कांग्रेस के कई सदस्यों ने इस्तीफा भी दिया। इन सदस्यों में सपा के नीरज शेखर, संजय सेठ और सुरेंद्र नागर तथा कांग्रेस के संजय सिंह और भुवनेश्वर कालिता शामिल हैं।

इससे पहले सर्वाधिक विधेयक पहली लोकसभा के एक सत्र में 1952 में पारित हुए थे, तब 64 दिनों की कार्यवाही में संसद ने 27 विधेयकों को मंजूरी दी थी। संसद का मुख्य काम जरूरी विधेयकों पर चर्चा कर उन्हें कानूनी रूप देना है। इस प्रक्रिया में सांसद अपनी राय देते हैं और संशोधन भी प्रस्तुत करते हैं। इस तरह पारित विधेयक देश की आकांक्षाओं के प्रतिनिधि होते हैं। लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने उचित ही कहा है कि, हमें लोगों के भरोसे पर खरा उतरना होगा, जिन्हें हमसे बहुत अपेक्षाएं हैं। विधेयकों के सदन में लाने में अध्यक्ष की बड़ी भूमिका होती है और आंकड़े इंगित करते हैं कि, वे इसे बखूबी निभा रहे हैं। इस सत्र की इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जाता है। उन्होंने कुछ दिनों पहले सदन की चर्चाओं में और सरकार की ओर से जवाब देने के वक्त गैरहाजिर रहने वाले मंत्रियों पर नाराजगी जतायी थी। इस सत्र के पहले दिन ही उन्होंने अपने दल और गठबंधन के सांसदों से भी अनुशासन और मर्यादा को लेकर गंभीर रहने का निर्देश देते हुए कहा था कि, संसद में पक्ष और विपक्ष को भूलकर देशहित में निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए।

एक समय संसद के प्रत्येक सत्र की शुरुआत हल्ले-हंगामे से होना अब उसकी नियति सी बन गई थी। संसद सत्र के ऐसे शुरुआती दिनों का स्मरण करना कठिन है, जब वहां हंगामे और नारेबाजी के बजाय कोई सार्थक बहस हुई हो अथवा तय विधायी कामकाज अपेक्षित गरिमा के साथ हुआ हो, चूंकि संसद सत्रों की शुरुआत हंगामे से ही होने लगी है, इसलिए विधानसभाओं में भी ऐसा ही होता है। मगर इस बार के बजट ने सभी नजीरों को तोड़ दिया है और ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो पूरे संसद के प्रति सकारात्मक माहौल बनाएगा।