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एनआरसी पर राजनीति गर्म
एनआरसी पर राजनीति गर्म|Syed Dabeer Hussain - RE
राज ख़ास

एनआरसी पर राजनीति गर्म

भारत कोई धर्मशाला नहीं कि, जो चाहे यहां आकर बस जाए, एनआरसी तैयार करने का एक बड़ा आधार यहींं था कि, सांस्कृतिक विरासत के साथ मूल निवासियों की पहचान भी खतरे में पड़ गई थी।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस, भोपाल। एनआरसी को लेकर सियासत शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि, भारत कोई धर्मशाला नहीं कि जो चाहे यहां आकर बस जाए। एनआरसी तैयार करने का एक बड़ा आधार यहींं था कि, सांस्कृतिक विरासत के साथ मूल निवासियों की पहचान भी खतरे में पड़ गई थी।

आखिरकार असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर एनआरसी की अंतिम लिस्ट सामने आ गई। इस लिस्ट के अनुसार, 19 लाख से अधिक लोग ऐसे हैं जो अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर पाए हैं, हालांकि यह एक बड़ी संख्या है, लेकिन असम के ही कई नेता अब यह सवाल कर रहे हैं कि, क्या केवल इतने ही लोग बांग्लादेश से घुसपैठ करके आए थे? इसी के साथ ऐसे सवाल भी उठ रहे हैं कि, इन 19 लाख लोगों का क्या होगा? यह सवाल इसके बावजूद उठ रहा है कि, एनआरसी में नाम न होने वालों को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में अपील का अधिकार दिया गया है और अपील करने की समय सीमा भी 60 से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है। इतना ही नहीं, अगर कोई फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले से संतुष्ट नहीं होता तो उसे अदालत जाने का अधिकार होगा। इसके बावजूद एनआरसी पर संकीर्ण राजनीति शुरू हो गई है। राजनीति करने के लिए इस तथ्य की अनदेखी की जा रही है कि, एनआरसी तैयार करने का काम उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत किया गया है।