आंध्र प्रदेश में पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु में फैली अनजान बीमारी
एलुरु में फैली अनजान बीमारी का खतराSocial Media

आंध्र प्रदेश में पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु में फैली अनजान बीमारी

कोरोना संक्रमण के मामलों में देश में तीसरे नंबर पर मौजूद आंध प्रदेश नई मुसीबत में फंस गया है। राज्य में नई बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। राज्य से दिल्ली तक हडक़ंप मचा है।

पूरा देश इस समय कोरोना की चुनौती से जूझ रहा है। ठीक इसी समय आंध्र प्रदेश में पश्चिम गोदावरी जिले के एलुरु में फैली अनजान बीमारी का खतरा पैदा हो गया है। अब तक 300 से ज्यादा लोग बीमारी की चपेट में हैं। इस बीमारी के मरीज जिले के अलग-अलग इलाकों में शनिवार रात को सामने आना शुरू हुए। मरीजों में चक्कर आने, सिरदर्द और मिर्गी जैसे लक्षण दिख रहे हैं। इसका कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। डॉक्टरों की स्पेशल टीमों को एलुरु भेजा गया है। वे घर-घर जाकर मरीजों की पहचान कर रही हैं। डॉक्टरों ने बताया कि सभी मरीजों के ब्लड, खाने और पानी के सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। अब तक उनकी रिपोर्ट नहीं आई है। सभी मरीजों की सीटी स्कैन और एक्सरे रिपोर्ट नॉर्मल आई है। हैरानी की बात यह है कि सभी मरीज अलग इलाकों के रहने वाले हैं। उनका आपस में कोई कॉन्टैक्ट नहीं है और हाल में वे किसी समारोह में शामिल भी नहीं हुए हैं। इसके बावजूद सभी में एक जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। आंध्र प्रदेश कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में तीसरे नंबर पर है।

बीमारी सरकार के लिए चुनौती बन कर आई है। गरीब देश होने के कारण बहुत सालों तक यहां संक्रामक बीमारियों टाइफाइड, मलेरिया का ही बोलबाला था। जैसे-जैसे देश अमीर होता गया, यहां बीमारियों की प्रवृत्ति बदलती चली गई और देश में गैर संक्रामक रोग बढ़ते गए। 2017 में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने रिपोर्ट जारी की, जिससे पता चला कि देश में बीमारियों का प्रोफाइल ही बदल गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 से 2016 के दौरान पिछले 26 वर्षों में मधुमेह 174 प्रतिशत और इस्केमिक हृदय रोग 104 प्रतिशत बढ़ गया। इस अवधि के दौरान संक्रामक रोग, जच्चा-बच्चा और पोषण संबंधी रोग 61 प्रतिशत से कम हो कर 33 प्रतिशत रह गए, जबकि गैर संक्रामक रोग 30 प्रतिशत से बढ़ कर 55 प्रतिशत हो गए। इन बीमारियों की एक खास बात यह है कि ये कभी ठीक नहीं होती और रोगी के पास जिंदगी भर दवाई खाने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। इनमें मधुमेह, कैंसर, रक्तचाप, हार्ट अटैक और स्ट्रोक शामिल हैं। ये बीमारियां पहले सिर्फ बूढ़े लोगों को होती थी, पर अब 30 से 35 साल के लोगों को भी बीमारियां हो रही हैं।

हालांकि ऐसा नहीं है कि गैर संक्रामक रोग बढऩे से संक्रामक रोगों का बोझ कम हो गया है। अभी भी दोनों रोगों का बोझ बढ़ ही रहा है। संक्रामक बीमारियों के इलाज में भी अब मुश्किलें देखी जा सकती हैं। देखा जा रहा है कि एंटीबायोटिक्स के काम न करने के कारण ये संक्रामक रोग लाइलाज होते जा रहे हैं। खराब पर्यावरण ही देश की सबसे मुश्किल बीमारियों की जड़ है। कोरोना ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया को अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से दुरुस्त करने पर जोर दिया है। मगर अचानक आ धमकने वाली बीमारी को रोकने को लेकर आज भी विज्ञान तैयार नहीं है।

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