श्राद्ध पक्ष
श्राद्ध पक्ष|Pankaj Baraiya - RE
राज ख़ास

अशुभ काल नहीं है श्राद्ध पक्ष

सामान्य रूप से पितृपक्ष यानी श्राद्ध के काल को मृत व्यक्तियों एवं पूर्वजों से जोड़ कर देखा जाता है और कहीं-कहीं इसे अशुभ काल माना जाता है

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस। श्राद्ध अपने अस्तित्व से, मूल से रूबरू होने और जड़ों से जुड़ने, उसे पहचानने व सम्मान देने का सामाजिक मिशन, मुहिम या प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसने प्राणायाम, योग, व्रत, उपवास, यज्ञ और असहायों की सहायता जैसे अन्य कल्याणकारी सकारात्मक कर्मों और उपक्रमों की तरह कालांतर में आध्यात्मिक और धार्मिक चादर ओढ़ ली। वक्त के इस पवित्र काल को अशुभ काल मानना नादानी है।

सामान्य रूप से पितृपक्ष यानी श्राद्ध के काल को मृत व्यक्तियों एवं पूर्वजों से जोड़ कर देखा जाता है और कहीं-कहीं इसे अशुभ काल माना जाता है, जो इस पावन कालखंड की बेहद त्रुटिपूर्ण व्याख्या है। समय के इस हिस्से में अपार संभावना छुपी हुई हैं। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तो एक ऐसी अदभुत बेला है, जिसमें मानव सृष्टि अपने अल्पप्रयास मात्र से वृहद और अप्रतिम परिणाम साक्षी बनती है। अध्यात्म के नजरिये से पितृपक्ष रूह और रूहानी यानी आत्मा और आत्मिक उत्कर्ष का वो पुण्यकाल है, जिसमें कम से कम प्रयास से अधिकाधिक फलों की प्राप्ति कर पाना संभव है। अध्यात्म, इस काल को जीवात्मा के कल्याण यानी मोक्ष के लिए सर्वश्रेष्ठ मानता है। जीवन-मरण के चक्र से परे हो जाने की अवधारणा को मोक्ष कहते हैं। श्रद्धया इदं श्राद्धम् अर्थात् अपने पूर्वजों की आत्मिक संतुष्टि व शांति और मृत्यु के बाद उनकी निर्बाध अनंत यात्र के लिए पूर्ण श्रद्धा से अर्पित कामना, प्रार्थना, कर्म व प्रयास को हम श्राद्ध कहते हैं। इस पक्ष को इसके अद्भुत गुणों के कारण ही पितृ और पूर्वजों से संबद्ध गतिविधियों से जोड़ा गया है। यह पक्ष सिर्फ मरे हुए लोगों का काल है, यह धारणा सही नहीं है।

Raj Express
www.rajexpress.co