शिक्षकों की समस्या का हल जरूरी
शिक्षकों की समस्या का हल जरूरी|Pankaj Baraiya - RE
राज ख़ास

शिक्षकों की समस्या का हल जरूरी

आज शिक्षक दिवस है, शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता कहा जाता है इस क्षेत्र के लिए एक मजबूत और दीर्घकालिक नीति लाई जाती लेकिन इसके बजाय अस्थायी इंतजामों को प्राथमिकता दी जा रही है।

राज एक्सप्रेस

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"आज शिक्षक दिवस है शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता भी कहा जाता है। मगर मौजूदा व्यवस्था में शिक्षक यह दायित्व पूरा नहीं कर पा रहे हैं। असल में पैबंद लगाने जैसे तरीकों ने ही हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था को ढहने के कगार पर ला खड़ा कर दिया है। होना तो यह चाहिए था कि इस क्षेत्र के लिए एक मजबूत और दीर्घकालिक नीति लाई जाती लेकिन इसके बजाय अस्थायी इंतजामों को प्राथमिकता दी जा रही है।"

राज एक्सप्रेस। शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता कहा जाता है। देश के भावी नागरिकों के बालमन की वैचारिक रचनात्मकता को सामने लाने और बच्चों का सर्वागीण विकास कर उनके व्यक्तित्व को हर तरह से तराशने वाले मानवीय माध्यम कहे जाते हैं। पर क्या हमारी शिक्षण व्यवस्था में शिक्षकों को ऐसा परिवेश मिल पाता है, जिसमें उनसे बच्चों के जीवन के हर पहलू को निखारने-संवारने की उम्मीद की जा सके। हालांकि, इस पर विचार कम ही किया जाता है, मगर हमारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक अहम पहलू स्वयं शिक्षकों के हालात भी हैं। यह बड़ा सच है कि सरकारी मशीनरी की अनगिनत जिम्मेदारियों तले शिक्षकों की रचनात्मकता भी दब रही है, जिसका खामियाजा सिर्फ छात्रों को ही नहीं, बल्कि हमारी पूरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था को उठाना पड़ रहा है।

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