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कश्मीर घाटी में लगातार बढ़ती जवानों की संख्या
कश्मीर घाटी में लगातार बढ़ती जवानों की संख्या|संपादित तस्वीर
राज ख़ास

कश्मीर पर पूरे देश की नजर

देशव्यापी चर्चा में कश्मीर छाया है। कश्मीर घाटी में कुछ बड़ा किए जाने की संभावना है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटकों, अमरनाथ यात्रियों को घाटी में रहने की अवधि में कटौती करने की सलाह दी है।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस, भोपाल। कश्मीर में जो कुछ चल रहा है, वह किसी बड़े कदम की ओर इशारा जरूर कर रहा है। कदम क्या होगा, भविष्य में पता चलेगा। पर्यटकों और अमरनाथ यात्रियों को जल्द से जल्द लौट जाने की हिदायत अनायास नहीं है। देखते हैं कि कश्मीर से क्या खबर आती है।

कश्मीर घाटी में लगातार बढ़ती जवानों की संख्या के बीच केंद्र सरकार भले ही पूरी कवायद को सुरक्षा से जोड़कर देख रही हो और यह भी कह रही हो कि उसका इरादा ऐसा कुछ करने का कतई नहीं है, जिससे घाटी का अमन-चैन बिगड़े। मगर कश्मीर में जो कुछ चल रहा है, वह किसी बड़े कदम की ओर इशारा जरूर कर रहा है। यह कदम क्या होगा, आने वाले समय में पता चलेगा, मगर अभी तो देशव्यापी चर्चा में कश्मीर ही छाया है। कश्मीर घाटी में कुछ बड़ा किए जाने की संभावना को इसलिए भी बल मिल रहा है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटकों, अमरनाथ यात्रियों को घाटी में रहने की अवधि में कटौती करने की सलाह दी है। सरकार ने पर्यटकों, अमरनाथ यात्रियों को सलाह दी है कि वे जल्द से जल्द घाटी से लौटने के लिए जरूरी कदम उठाएं। गृह विभाग ने आतंकी हमलों की आशंका के मद्देनजर शुक्रवार दोपहर को यह एडवाइजरी जारी की है। प्रमुख सचिव ने एडवाइजरी में कहा है कि पर्यटक और अमरनाथ यात्री जितना जल्द हो सके लौट जाएं।

एडवाइजरी में कहा गया है कि अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले के मद्देनजर ताजा खुफिया सूचनाओं और घाटी के हालातों को देखते हुए सलाह दी जाती है कि अमरनाथ यात्री और पर्यटक जल्द से जल्द घाटी से लौट जाएं। यह आदेश इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि हाल ही में घाटी में करीब 10 हजार सैनिकों की तैनाती के बाद 28 हजार सैनिकों की तैनाती का आदेश जारी हुआ है। इसे लेकर सूबे की सियासत गर्मा गई है और पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। सरकार की तरफ से सेना की बड़ी संख्या में तैनाती से 3 संभावनाओं को बल मिलता है। पहला-सरकार का इरादा पीओके को भारत में शामिल करने का हो सकता है। 2014 में सरकार में आने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी लगातार बलूचिस्तान का मुद्दा उठाते रहे हैं। यही हिस्सा आतंकियों की पनाहगाह बना हुआ है और आतंकी कैंप भी इसी क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। अगर पीओके को भारत का हिस्सा बना लिया जाए तो यह संभव है कि आतंकी वारदातों पर अंकुश लग जाए।

दूसरी संभावना 35ए और धारा-370 को खत्म करने की भी बताई जा रही है। हालांकि, पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर को लेकर हुई भाजपा की बैठक में इस मुद्दे को न छेड़ने का फैसला हुआ था, मगर जिस तरह से विपक्षी पार्टियां सरकार को घेर रही हैं, उससे इस मुद्दे को नजरंदाज कतई नहीं किया जा सकता। तीसरी संभावना के रूप में सरकार कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों की संख्या इसलिए भी बढ़ा रही है ताकि वह अपनी ताकत दिखा सके। कश्मीर में इसी साल विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं और भाजपा कुछ समय तक राज्य में सरकार का हिस्सा रह चुकी है। इसलिए मंशा यह हो सकती है कि चुनाव से पहले घाटी में सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता किए जा सकें। फिलहाल सच क्या है, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।