संक्रमण की रफ़्तार में कमी पर मरने वालों का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा
संक्रमण की रफ़्तार में कमी पर मरने वालों का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहाSocial Media

संक्रमण की रफ़्तार में कमी पर मरने वालों का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा

देश में संक्रमण की रफ़्तार में भले ही कमी आई है, पर मरने वालों का आंकड़ा बार-बार चिंता बढ़ा रहा है। देश में पिछले कुछ दिनों से ऑक्सीजन के अभाव में लोगों ने दम तोड़ा है।

देश में संक्रमण की रफ़्तार में कमी आई है, मगर मरने वालों का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि, भारत में कोविड-19 के मामले दो करोड़ का आंकड़ा पार कर गए हैं और महज 15 दिनों में संक्रमण के 50 लाख से अधिक मामले आए हैं। बस राहत की बात यह है कि केसों की जो संख्या चार लाख पार कर गई थी, वह थम गई है। मौतों की एक वजह सामने आ रही है, वह है ऑक्सीजन की किल्लत। अस्पतालों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाने का मसला गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट की सख्ती से भी हालात सुधरे नहीं हैं। हर दिन कहीं न कहीं मरीजों की मौत की खबर आ रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब यहां कोरोना मरीज सिर्फ इसलिए मर रहे हैं कि अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन और दवाइयां नहीं हैं तो और जगह या हाल होगा! अब कोई संशय नहीं बचा कि सरकारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। ऊपर से हैरत यह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने पर्याप्त चिकित्सा ऑक्सीजन का दावा किया था।

पिछले एक हफ्ते में ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि की बात कही और फिर भी लोग ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ रहे हों तो इसका दोषी किसे ठहराया जाए? अपनी नाकामियों का बचाव करना किसी भी सरकार के लिए शर्म की बात होनी चाहिए। सरकारों का ऐसा रवैया बताता है कि उनके लिए लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है। पिछले चार-पांच दिनों में सिर्फ इतनी ही प्रगति हुई है कि अदालतों की फटकार के बाद केंद्र ने ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया। राज्यों से रेल टैंकरों के जरिए ऑक्सीजन अस्पतालों तक पहुंचाने की कवायद शुरू हुई। लेकिन यह सब तब देखने को मिला जब बड़ी अदालतों ने मोर्चा संभाला। अगर सरकारों में जरा भी जिम्मेदारी का भाव होता तो हालात बिगडऩे से पहले ही मोर्चा संभाल लेतीं और बड़ी संख्या में लोगों की जान सिर्फ इसलिए नहीं जाती कि ऑक्सीजन नहीं मिली।

अब भी कई अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है। इससे हालात किस तरह चरमरा गए हैं, यह खुल कर उजागर हो चुका है। ऑक्सीजन की कमी से अस्पतालों ने गंभीर मरीजों तक को भर्ती करना बंद कर दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर मरीज जाएंगे कहां। या सडक़ों पर पड़े दम तोड़ते रहेंगे? संक्रमण फैलाव की रफ़्तार को देख कर लगता नहीं कि इससे जल्दी छुटकारा मिल जाएगा। और अब तो विशेषज्ञ तीसरी लहर का बात भी कह रहे हैं। जाहिर है, आने वाले वक्त में ऑक्सीजन की भारी जरूरत पड़ेगी। इसीलिए ऑक्सीजन का अतिरिक्त भंडार भी तैयार रखना होगा। अगर अब भी सरकारें नहीं चेतीं तो महामारी से इतर संकट भी खड़े हो सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सरकारें सजग हों और मेडिकल सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करके रखें। ताकि फिर संकट बड़ा हो तो देश में तत्काल व्यवस्था की जा सके।

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