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आज है विश्व शिक्षक दिवस
आज है विश्व शिक्षक दिवस|Syed Dabeer Hussain - RE
राज ख़ास

'विश्व शिक्षक दिवस' पर शिक्षकों की दिलचस्प कहानियाँ

5 अक्टूबर सन् 1966 में अंतर सरकारी सम्मेलन में 'टीचिंग इन फ्रीडम' संधि पर हस्ताक्षर हुआ था। शिक्षकों के अधिकार एवं जिम्मेदारी, भर्ती, रोजगार सीखने एवं सिखाने के माहौल से संबंधित सिफारिशें की गई थी।

रवीना शशि मिंज

राज एक्सप्रेस। आज तारीख है 5 अक्टूबर, इस तारीख की खास बात ये है कि आज के दिन को 'विश्व शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

ये हमें बताने की जरूरत नहीं कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में शिक्षकों की क्या अहमियत होती है। शिक्षक वह होता है जो अपने शिष्यों में भेद नहीं करता है और सभी को सही रास्ता दिखाता है।

विश्व शिक्षक दिवस मनाने के पीछे का कारण :-

फ्रांस की राजधानी पेरिस में 5 अक्टूबर सन् 1966 में अंतर सरकारी सम्मेलन का आयोजन हुआ था। जिसमें 'टीचिंग इन फ्रीडम' संधि पर हस्ताक्षर किया गया था। संधि में शिक्षकों के अधिकार एवं जिम्मेदार, भर्ती, रोजगार सीखने एवं सिखाने के माहौल से संबंधित सिफारिशे की गईं थी।

5 अक्टूबर 1977 में आयोजित एक सम्मेलन में उच्चतर शिक्षा से जुड़े शिक्षकों की स्थिति को लेकर यूनेस्को की अनुशंसाओं को अंगीकृत किया गया था। शिक्षा पेशे को प्रोत्साहित करने के लिए यूनिस्कों ने इस दिन (विश्व शिक्षक दिवस) को मनाने का सुझाव दिया था। वैसे आपको बता दें, कि सभी देशों में अलग-अलग दिनों में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

आज विश्व शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में जानते हैं, दुनिया के ऐसे शिक्षकों के बारे में जिन्होंने शिक्षा को नया आयाम दिया। विश्व के ये पाँच शिक्षक जिन्होंने शिक्षा में क्रांति लाकर बेहतरीन ढांचे में तब्दील करने की कोशिश की :--

1. फ़्रीड्रिक फ्रोबेल -

शिक्षा के क्षेत्र में किंडरगार्टन या पूर्व विद्यालीय शिक्षा की अवधारणा लाने वाले जर्मन शिक्षक फ्रीड्रिक फ्रोबेल थे। उन्हें 19वीं शताब्दी में शिक्षा सुधारक के नाम से जाना जाता था। फ्रोबेल ने किंडरगार्टन में बच्चों के स्वभाव, प्रवत्ति और आवेग को समझने पर जोर दिया था। वे मानते थे कि मनुष्य मस्तिष्क का विकास जन्म से 3 साल के बीच में सबसे अधिक होता है।

किंडरगार्टन या पूर्व विद्यालीय शिक्षा की अवधारणा लाने वाले जर्मन शिक्षक फ्रीड्रिक फ्रोबेल थे
किंडरगार्टन या पूर्व विद्यालीय शिक्षा की अवधारणा लाने वाले जर्मन शिक्षक फ्रीड्रिक फ्रोबेल थे
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2. जॉन अमोस कोमेनियस

' फादर ऑफ मार्डन ऐजुकेशन' के नाम से मशहूर जॉन अमोस कोमेनियस ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रायोगिक यानि एक्सपेरिमेंट का महत्व समझाया। वे पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें लगता था कि, पाठ्य पुस्तक में विषय से संबंधित चित्र, पढ़ने और समझने में मददगार साबित होंगे। हुआ भी कुछ ऐसा ही, आपको दुनियाभर की पाठ्य पुस्तकों में विषय से प्रासंगिक चित्र देखने को मिलते हैं।

जॉन अमोस कोमेनियस ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रायौगिक यानि एक्सपेरिमेंट का महत्व समझाया था।
जॉन अमोस कोमेनियस ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रायौगिक यानि एक्सपेरिमेंट का महत्व समझाया था।
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3. ऐनी सुलिवान

हेलेन केलर को तो हम सब जानते हैं। हेलेन की सफलता के पीछे कुछ योगदान उनकी शिक्षिका ऐनी सुलिवान का भी है। बधिर और दृष्टिहीन हेलेन की शिक्षिका सुलिवान ने उन्हें स्कूली शिक्षा के साथ स्तानक स्तर तक पढ़ाया। जिसके बाद हेलेन उस समय की आर्ट्स में स्नातक करने वालीं पहली दृष्टिहीन थीं। सुलिवान स्पेशल बच्चों को पढ़ाने के लिए साइन लेंग्वेज यानि सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल करती थीं। सुलिवान के इस योगदान से पूरी दुनिया को संदेश मिला की स्पेशल बच्चों को पढ़ाना असंभव कार्य नहीं है।

सांकेतिक  भाषा की मदद से स्पेशल बच्चों को पढ़ाती थीं ऐनि सुलिवाना।
सांकेतिक भाषा की मदद से स्पेशल बच्चों को पढ़ाती थीं ऐनि सुलिवाना।
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4. सर्वपल्ली राधाकृष्ण

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए विश्व में प्रसिद्ध हैं। सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान दार्शनिक और वरिष्ठ शिक्षक थे। उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा पर जोर दिया। उनका मानना ​​था कि शिक्षा में आध्यात्मिक भावनाओं का विकास होना जरूरी है।

महान दार्शनिक सर्वपल्ली राधाकृष्ण।
महान दार्शनिक सर्वपल्ली राधाकृष्ण।
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5. सावित्रीबाई फु्ले

भारत की पहली महिला शिक्षिका कौन हैं आप जानते हैं? अगर नहीं तो चलिए हम बताते हैं। भारत की पहली महिला टीचर का नाम सवित्री बाई फु्ले है। इन्होंने भारत की महिलाओं के लिए पहला महिला स्कूल खोला था। सावित्री जी उन चुनिंदा अद्भुत शख्सियतों में से एक हैं जिन्होंने पूर्व में देश में जाति व्यवस्था और अन्य सामाजिक बुराइयों की निरंकुशता के खिलाफ बिगुल बजाया।

सावित्री बाई फुले देश की पहली महिला अध्यापक हैं।
सावित्री बाई फुले देश की पहली महिला अध्यापक हैं।
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मध्यप्रदेश में भी कई ऐसे टीचर्स हैं जिनके अथक प्रयासों से उन्हें मेहनती और क्रांतिकारी टीर्चर्स की श्रेणी में रखा जा सकता है:-

1. वासुदेव पांचाल

इंदौर के देपालपुर विकासखंड के गिरोटा गाँव के सरकारी स्कूल में चपरासी हैं वासुदेव पांचाल। वासुदेव स्कूल की सफाई करने के बाद स्कूल के बच्चों को संस्कृत पढ़ाते हैं। वे ये काम पिछले 23 सालों से कर रहे हैं। चूंकि गिरोटा का ये स्कूल इंदौर जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर है इसलिए यहाँ कोई भी टीचर पढ़ाने नहीं आना चाहता। वासुदेव शिक्षित हैं, उन्हें संस्कृत भाषा का ज्ञान है इसलिए स्कूल में उन्हें संस्कृत पढ़ाने का कार्यभार दिया गया है।

वासुदेव पांचाल शहर के सरकारी स्कूल में चपरासी हैं।
वासुदेव पांचाल शहर के सरकारी स्कूल में चपरासी हैं।
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2. बी.एस. ठाकुर

2000-2004 में स्कूल शिक्षक, 2006-2009 में ग्रामप्रधान और अब सब इंस्पेक्टर पद में होने के साथ स्कूलों में पढ़ाना, ये हैं 'बी.एस. ठाकुर'। सब इंस्पेक्टर बीएस ठाकुर जनता की रक्षा करने के साथ बच्चों को स्कूलों में पढ़ाते हैं। जुवेनाइल क्राइम, साइबर क्राइम के प्रति जागरूक करने के अलावा, उनके विषय की किताबें भी पढ़ाते हैं।

हमारी सब इंस्पेक्टर बी. एस. ठाकुर से जब बात हुई तो उन्होंने बताया कि, पढ़ाना उनका शौक है। पुलिस में आने से पहले वे टीचिंग लाइन में ही थे। तो उन्हें बच्चों के पढ़ाने में खुशी मिलती है। बीएस ठाकुर से जब सोशल अवेयरनेस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा पुलिस विभाग सभी स्कूलों में सामाजिक जागरूक कार्यक्रम चलाती है। मैं उनके कार्यक्रम में तो शामिल होता ही हूँ, साथ ही अलग से स्कूलों में जाकर ऐसे कैंपेन चलाता हूँ।

सब इंस्पेक्टर बी. एस ठाकुर   को बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है।
सब इंस्पेक्टर बी. एस ठाकुर को बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है।
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