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जानिए डे नाईट टेस्ट में उपयोग होने वाली पिंक बॉल की कुछ खास बातें
जानिए डे नाईट टेस्ट में उपयोग होने वाली पिंक बॉल की कुछ खास बातें|Social Media
खेल

डे-नाईट टेस्ट मैच में उपयोग होने वाली पिंक बॉल की कुछ खास बातें

हम आपको बता रहे हैं पिंक बॉल के कुछ सीक्रेट्स साथ ही पिंक बॉल को कैसे और कितने दिन में बनाया जाता है।

Ankit Dubey

राज एक्सप्रेस। भारत और बांग्लादेश के बीच जारी टेस्ट सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान पर 22 नवंबर से शुरू होने वाला है। यह टेस्ट मैच बहुत खास है क्योंकि यह मैच डे-नाइट टेस्ट मैच के रूप में खेला जाएगा। इस टेस्ट मैच में उपयोग की जाने वाली पिंक बॉल से क्रिकेट देखने के लिए सभी भारतीय उत्सुक हैं। भारतीय सरजमीं पर पहली बार पिंक बॉल से क्रिकेट खेला जाएगा और इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच को शानदार बनाने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है। सभी लोग पिंक बॉल को लेकर सोच में पड़े हैं कि यह बॉल स्पिन करेगी, स्विंग करेगी या किस तरह अपना खेल दिखायेगी।

हम आपको बता रहे हैं पिंक बॉल के कुछ सीक्रेट्स साथ ही पिंक बॉल को कैसे और कितने दिन में बनाया जाता है।

पिंक बॉल होगी ज्यादा स्विंग

पिंक बॉल को लेकर बीसीसीआई के एक अधिकारी ने मीडिया में बताया कि रिवर्स स्विंग के लिए गुलाबी गेंद की सिलाई हाथ से की जाती है, ताकि यह रिवर्स स्विंग में गेंदबाजों को मदद दे सकें। उन्होंने बताया कि गुलाबी गेंद को हाथ से सिलकर बनाया जाता है ताकि गेंद अधिक से अधिक रिवर्स स्विंग कर सकें। उन्होंने कहा कि गुलाबी गेंद की स्विंग हासिल करने में गेंदबाजों को कोई समस्या नहीं होगी।

8 दिन का वक्त लगता है गुलाबी गेंद बनाने में

गुलाबी गेंद को बनाने की बात की जाए तो इस गेंद को बनाने में करीब 8 दिन का वक्त लगता है। इस गेंद को बनाने की प्रक्रिया में गुलाबी रंग का चमड़ा चढ़ाया जाता है, जब चमड़ा तैयार हो जाता है तो फिर उन्हें टुकड़ों में रखकर बाद में गेंद को ढंका जाता है, जिसके बाद चमड़े की कटिंग से इसे सिला जाता है और रंगा जाता है फिर उसे सिलाई करके तैयार किया जाता है। गेंद के अंदरूनी हिस्से में सिलाई पहले ही कर दी गई होती है, फिर बाहर और ऊपरी हिस्से पर सिलाई की जाती है, पूरी प्रक्रिया होने के बाद अंतिम रूप में तोलने और बाहर भेजने से पहले अच्छी तरह से रंग किया जाता है। यह गेंद लाल गेंद से थोड़ी भारी मानी जाती है।

आपको बता दें कि नियमित टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट मैच में जो गेंद इस्तमाल की जाती हैं, उनको बनाने में केवल 2 या 3 दिन का समय लगता है, लेकिन पिंक बॉल को बनाने और उसकी प्रक्रिया को पूरा करने में करीब 8 दिन का वक्त लग जाता है, इसमें उपयोग किए जाने वाले लेदर को भी विदेशों से मंगाया जाता है।

भारतीय टीम कोलकाता पहुंच चुकी है और सभी खिलाड़ियों ने गुलाबी गेंद से अभ्यास करना भी शुरू कर दिया है अब देखना यह है कि, 22 नवंबर से शुरू होने वाले इस टेस्ट मैच में गुलाबी गेंद से पहली बार टेस्ट क्रिकेट खेल रही है, भारत और बांग्लादेश की टीम में कौन सी टीम बेहतर प्रदर्शन कर इस टेस्ट मैच को जीत पाती है।

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