Ranji Final : जायसवाल का अर्धशतक, मुंबई के पांच विकेट पर 248 रन
Ranji Final : जायसवाल का अर्धशतक, मुंबई के पांच विकेट पर 248 रनSocial Media

Ranji Final : जायसवाल का अर्धशतक, मुंबई के पांच विकेट पर 248 रन

रणजी ट्रॉफी फाइनल के पहले दिन मुंबई ने मध्य प्रदेश के खिलाफ पांच विकेट के नुकसान पर 248 रन बना लिए हैं।

बेंगलुरू। पिछले 23 सालों में घरेलू क्रिकेट में अपने सबसे बड़े दिन मध्य प्रदेश ने दबाव और दुर्भाग्य को मात दी और लगातार चौथे प्रथम श्रेणी शतक की ओर अग्रसर यशस्वी जायसवाल की चुनौती का सामना किया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए एक समय पर 147 पर दो की स्थिति में रहने वाली मुंबई ने निरंतर विकेट गंवाए, जिसके चलते बेंगलुरु में खेला जा रहा रणजी ट्रॉफी फाइनल पहले दिन के बाद बराबरी की स्थिति में है। पहले दिन मुंबई ने पांच विकेट के नुकसान पर 248 रन बनाए।

जब दिन का खेल समाप्त हुआ तब इस सीजन के सर्वाधिक रन स्कोरर सरफराज खान 40 रन बनाकर नाबाद थे और शम्स मुलानी उनका साथ दे रहे थे। काले बादलों से घिरे आकाश के कारण एक सूखी पिच और नहीं टूटी। पहले ही ओवर से गेंद घूम रही थी और मध्य प्रदेश ने अपने दोनों स्पिनरों का बढ़िया इस्तेमाल किया। हालांकि उनके तेज गेंदबाजों ने प्रभावित किया और उन्हें नियंत्रण के साथ गेंदबाजी करने का फायदा मिला।

गौरव यादव ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। 23 ओवरों में कई मौके बनाने के बावजूद उन्हें विकेट नहीं मिली। उन्होंने पहले घंटे में एक ही ओवर में पृथ्वी शॉ को बाहरी और अंदरूनी किनारे पर पांच बार बीट किया। इस मेहनत का फल अनुभव अग्रवाल को मिला। गौरव ने उस ओवर में हरकत करती गेंद के खिलाफ पृथ्वी के मन में संदेह पैदा किया। बाहर निकलती गेंद समझकर पृथ्वी फ्रंट फुट पर आए, लेकिन गेंद सीम पर पड़कर अंदर आई और उनके स्टंप्स पर जा लगी।

दूसरे छोर पर जायसवाल ने पिछली पीढ़ी की तरह गेंदबाजों को थकाया और फिर खराब गेंदबाजी पर टूट पड़े। तेज गेंदबाजी के खिलाफ उन्होंने शरीर से दूर जाती गेंदों को छोड़ा और स्पिन के खिलाफ प्रहार किया। बाएं हाथ के स्पिनर कुमार कार्तिकेय के खिलाफ छक्का लगाकर जायसवाल ने बाउंड्री का खाता खोला। उन्होंने विपक्षी टीम के सबसे घातक बल्लेबाज को आड़े हाथों लिया। इससे पहले चौथे ओवर में वह भाग्यशाली रहे जब तालमेल की कमी के कारण रन आउट का मौका बना था।

स्क्वेयर लेग पर गेंद को मोड़ने के बाद जायसवाल आधी पिच तक पहुंच गए थे, जहां से उन्हें वापस भेजा गया। थ्रो विकेटकीपर से काफी दूर था और उन्हें क्रीज में सुरक्षित वापस लौटने का समय मिला। पहले सेशन में ऐसे कई मौके बने। इस रन आउट के अलावा कार्तिकेय के आर्म बॉल पर पृथ्वी के बल्ले का अंदरूनी किनारा लगा और गेंद शॉर्ट लेग के सिर के ऊपर से निकल गई। 10वें ओवर में क्रीज में खड़े रहकर ड्राइव लगा रहे पृथ्वी के बल्ले का मोटा बाहरी किनारा लेकर गेंद दूसरी स्लिप और गली के बीच से निकल गई। जायसवाल लगातार चौथे प्रथम श्रेणी शतक की ओर आगे बढ़ रहे थे,लेकिन ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद को छेड़ने के बाद उन्हें निराश होकर पवेलियन जाना पड़ा। विजय मर्चंट और सचिन तेंदुलकर के बाद ऐसा करने वाले वह केवल तीसरे खिलाड़ी होते।

पिछले चार बल्लेबाजों की तरह हार्दिक तामोरे को भी अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन वह इसको बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए। वह स्पिन के लिए खेल गए जबकि गेंद सीधी रही और बाहरी किनारा लेकर स्लिप में चली गई। सारांश को इस तरह अपना दूसरा विकेट मिला। इससे पहले अक्षत रघुवंशी ने 22 के स्कोर पर स्लिप में उनका कैच टपकाया था। 75वें ओवर में साथ आए सरफराज और मुलानी ने यह सुनिश्चित किया कि टीम दिन का खेल समाप्त होने तक और कोई विकेट ना गंवाए।

उन्होंने छोर संभाले रखा और अब दूसरी नई गेंद के विरुद्ध अपना संघर्ष जारी रखेंगे। अब बारी थी सुवेद पारकर की। अजिंक्य रहाणे के चोटिल होने के कारण नॉकआउट मैचों में चुने गए पारकर ने चौथे नंबर पर आकर 18 रन बनाए, जिसके बाद उनके बल्ले के बाहरी किनारे ने मिडविकेट पर श्रीवास्तव को आसान कैच थमाया। आदित्य श्रीवास्तव की चतुर कप्तानी ने उन्हें यह विकेट दिलाई। यह गेंद आर्म बॉल नहीं थी,लेकिन वह पड़कर सीधी निकल गई और अरमान 26 रन बनाकर पवेलियन लौटे।

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