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#ShameOnGautamGambhir: आखिर क्यों हो रहा ट्रेंड

दिल्ली में प्रदूषण को लेकर इन बदतर हालातों के बीच एक संसदीय पैनल की बैठक रखी गई थी जिसमें गौतम गंभीर सहित अन्य सांसदो को भी शामिल होना था।

Ankit Dubey

राज एक्सप्रेस। फिलहाल दिल्ली में प्रदूषण के हालात बदतर होते जा रहे हैं, वहां रहना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन साबित हो रहा है, वहां सांस लेना लोगों के लिए एक बड़े परेशानी है। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर इन बदतर हालातों के बीच एक संसदीय पैनल की बैठक रखी गई थी, जिसमें गौतम गंभीर सहित अन्य सांसद को भी शामिल होना था, लेकिन वहां केवल 4 सांसद ही मौजूद रहे। सभी बड़े नेता इस बैठक से मुकर गए। पर्यावरण मंत्री जय प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि वह इस मामले पर जांच करेंगे और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक में गौतम गंभीर को भी शामिल होना था, जो बीजेपी से हाल ही में जीत कर जनता के भले की बात किया करते हैं। वो इंदौर में चल रहे भारत और बांग्लादेश के मैच के बीच पोहा जलेबी का स्वाद लेते नजर आए।

गौतम गंभीर का हो रहा कड़ा विरोध

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और अब राजनेता बने गौतम गंभीर दिल्ली के एकमात्र सांसद हैं जिनका नाम सूची में था, वह भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए और इस को लेकर उनका कड़ा विरोध चल रहा है, ट्विटर पर उनको लेकर #ShameOnGautamGambhir ट्रेंड कर रहा है। गौतम गंभीर भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे पहले टेस्ट मैच के लिए इंदौर में मौजूद है, वहां अपने मित्र और कॉमेंटेटर साथियों के साथ जलेबी पोहा का मजा उठाते नजर आए। इसी को देखते हुए ट्विटर पर सभी लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं और यह विरोध करना सही भी है, क्योंकि एक नेता जो कि हमेशा लोगों के भले की बात करता है वह इस तरह किसी बड़े मुद्दे पर बैठक में जाने से एतराज नहीं कर सकता।

हेमा मालिनी भी नहीं हुई शामिल

भारत की जानी-मानी कलाकार और पॉलिटिशियन बनी हेमा मालिनी भी इस मीटिंग में नजर नहीं आई।

आम आदमी पार्टी ने किया विरोध

आम आदमी पार्टी ने गौतम गंभीर का इस बैठक में ना पहुंचने पर कड़ा विरोध किया है।

दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि वह सांस लेना भी मुश्किल है, लोग वहां किस तरह अपना गुजर-बसर कर रहे हैं यह वही लोग जानते हैं।

इससे पहले गौतम गंभीर ने चिल्ड्रन डे पर सभी को बधाई देते हुए एक संदेश भी पेश किया था, जिसमें वे प्रदूषण को लेकर अच्छाई की बात कर रहे थे, पर उन्होंने इस बैठक में शामिल ना होकर खुद ही अपने आप को गलत साबित कर लिया है।

बैठक में होने थे बड़े फैसले

बैठक में सदस्य विभिन्न सवालों को उठाने की योजना बना रहे थे, इसमें केंद्र के पास वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राज्यों को दी जाने वाली धन राशि का उपयोग सही दिशा में हो रहा है या नहीं यह बड़ा एवं सवाल था, साथ ही वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान के लिए अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो इसकी भी योजना बनानी थी।

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