दक्षिण अफ्रीका का टेस्ट श्रृंखला के लिए न्यूजीलैंड दौरा
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दक्षिण अफ्रीका का न्यूजीलैंड में कमजोर टीम भेजना टेस्ट के लिए खतरे की घंटी

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निक हॉकले ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका का न्यूजीलैंड में कमजोर टीम भेजना टेस्ट के लिए खतरे की घंटी है।

हाइलाइट्स :

  • दक्षिण अफ्रीका का न्यूजीलैंड में कमजोर टीम भेजना टेस्ट के लिए खतरे की घंटी।

  • एसए-20 लीग के कारण दक्षिण अफ्रीका के राजस्व पर प्रभाव।

  • दक्षिण अफ्रीका को न्यूजीलैंड में अपना पहला टेस्ट 4 फरवरी से खेलना है।

सिडनी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निक हॉकले ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका का न्यूजीलैंड में कमजोर टीम भेजना टेस्ट के लिए खतरे की घंटी है। हॉकले ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका का न्यूजीलैंड में एक कमजोर टीम भेजना टेस्ट क्रिकेट के लिए खतरे की घंटी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत जैसे तीन बड़े देशों के इतर भी टेस्ट क्रिकेट को प्रासंगिक बनाए रखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट के भविष्य और उसके ऊपर चल रही चर्चाओं को ध्यान में रखते हुए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में कम से कम तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेले जाने की वकालत करने की तैयारी कर रही है।

मौजूदा विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के प्रावधानों के अनुसार एक टेस्ट सीरीज में कम से कम दो मैच खेलना अनिवार्य है। दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच चल रही सीरीज के 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुई है। पिछली बार भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को छोड़कर कोई तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला 2018-19 में खेली गई थी, जब पाकिस्तान ने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था।

उन्होंने कहा, “कम से कम तीन टेस्ट मैच प्राथमिकता में होने चाहिए। इसलिए हम इसकी वकालत करते रहेंगे। जहां तक घरेलू स्तर की टी-20 श्रृंखलाओं की बात है तो हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि यह उन देशों में खेले जाने वाली श्रृंखलाओं के साथ ओवरलैप ना हो जहां ऐसी श्रृंखलाएं उनकी कमाई का अहम जरिया हैं।”

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एसए-20 लीग के कारण दक्षिण अफ्रीका के राजस्व पर पड़े प्रभाव को स्वीकारा है लेकिन इसके अफ्रीकी टीम का न्यूजीलैंड में अपनी दूसरे दर्जे की टीम को भेजने का फैसला चर्चा को अलग स्तर पर ले गया है। दक्षिण अफ्रीका ने इस पर बल देते हुए कहा है कि वह टेस्ट क्रिकेट के प्रति समर्पित हैं और आगे पूरी कोशिश करेंगे कि भविष्य में ऐसे टकराव की स्थिति उत्पन्न ना हो।

उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए खतरे की घंटी है। बच्चों और नए लोगों को क्रिकेट की ओर आकर्षित करने में टी-20 की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता लेकिन हमारा विश्वास है कि इन दोनों का अस्तित्व एक साथ बना रह सकता है। मुझे लगता है कि हम ऑस्ट्रेलिया में इस बात को लेकर पूरी तरह से स्पष्ट हैं कि बिग बैश के दौरान भी हम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को ही प्राथमिकता देंगे। और हम इस मसले पर आईसीसी के साथ आगे काम भी करेंगे।”

हॉकले इस बात को लेकर आत्मविश्वास से भरे हैं भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाहर भी देश टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर समर्पित हैं लेकिन इस प्रारूप का आर्थिक पक्ष बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, “आर्थिक चुनौती बड़ा कारण है। कई देशों में टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 तीनों से एक जैसा ही राजस्व प्राप्त होता है लेकिन टेस्ट में लगने वाला धन अधिक होता है। हमारे सामने उन देशों की मदद करने की चुनौती है जो टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से संघर्ष कर रहे हैं।”

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