गुलाबी गेंद के साथ अभ्यास करने का थोड़ा और समय होता तो अच्छा होता : मिताली राज
गुलाबी गेंद के साथ अभ्यास करने का थोड़ा और समय होता तो अच्छा होता : मिताली राजSocial Media

गुलाबी गेंद के साथ अभ्यास करने का थोड़ा और समय होता तो अच्छा होता : मिताली राज

कितने आश्चर्य की बात है ना कि अपने पहले डे-नाइट टेस्ट मैच से पहले गुलाबी गेंद से परिचित होने के लिए मेहमान टीम को केवल दो दिनों का समय मिला।

क्वींसलैंड। कितने आश्चर्य की बात है ना कि अपने पहले डे-नाइट टेस्ट मैच से पहले गुलाबी गेंद से परिचित होने के लिए मेहमान टीम को केवल दो दिनों का समय मिला। गुरुवार से गोल्ड कोस्ट में शुरू हो रहे इस मैच से पहले भारतीय कप्तान मिताली राज ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी टीम ने मंगलवार को पहली बार गुलाबी गेंद के साथ अभ्यास किया।

मिताली ने बुधवार को एक ऑनलाइन बातचीत में भारतीय संवाददाताओं से कहा, हमने कल पहली बार गुलाबी गेंद के साथ एक अभ्यास सत्र में भाग लिया। हर किसी के लिए यह नया अनुभव था क्योंकि हम इस गेंद को खेलने के लिए इतने अभ्यस्त नहीं हैं। इस गेंद को खेलने पर पहला ख्याल यह आता है कि यह गेंद काफ़ी हरक़त करती है।

क्रिकइंफ़ो ने मंगलवार को अपने स्टंप माइक कार्यक्रम में जानकारी दी थी कि कैसे भारतीय टीम ने इस मल्टी-फ़ॉर्मेट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना होने से पहले बेंगलुरु में दो हफ़्तों के अपने प्रशिक्षण शिविर में गुलाबी गेंद से कोई अभ्यास नहीं किया था। हालांकि एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में रोशनी के तहत दो इंट्रा-स्क्वॉड मैच आयोजित किए गए थे और खिलाड़ियों ने कम से कम शाम के एक प्रशिक्षण सत्र में भाग लिया, जिसमें क्षेत्ररक्षण का अभ्यास शामिल था, गुलाबी गेंद उस शिविर में कहीं दिखाई ही नहीं दी।

मिताली ने कहा, उस शिविर में हम वनडे सीरीज की तैयारी कर रहे थे इसलिए हमारा ध्यान सफ़ेद गेंद से अभ्यास करने पर केंद्रित था। साथ ही हमने दूधिया रोशनी में कुछ मुक़ाबले भी खेले ताकि हम डे-नाइट टेस्ट और वनडे सीरीज के एक डे-नाइट मैच के लिए खुद को तैयार कर सकें।

ऑस्ट्रेलिया के खलिाफ़ गुलाबी गेंद से टेस्ट इस साल भारतीय महिला टीम का दूसरा टेस्ट मैच है। उन्होंने जून में इंग्लैंड के खलिाफ़ लाल गेंद से खेला गया टेस्ट मैच ड्रॉ किया था। उन सीरीज की तरह इस मल्टी-फ़ॉर्मेट सीरीज में भी टीमों को टेस्ट मैच जीतने पर चार और ड्रॉ करवाने पर दो-दो अंक मिलेंगे वहीं हर वनडे और टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच जीतने पर उन्हें दो अंक दिए जाएंगे। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच सात सालों के लंबे अंतराल के बाद आया था। और तो और घरेलू क्रिकेट में भी 2018-19 सीजन के बाद से महिलाओं के लिए केवल वनडे और टी20 मैचों का आयोजन हुआ है।

11 टेस्ट कैप के साथ मिताली और तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी इस टीम की सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। इन दोनों ने घरेलू स्तर पर महिलाओं के लिए बहु दिवसीय टूर्नामेंटों को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है। मिताली ने कहा, अगर हम चाहते हैं कि महिला टीम इस प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन करें, तो हमें घरेलू स्तर पर उन्हें लंबे प्रारूप खेलने का अनुभव कराना होगा। अगर इसी तरह टेस्ट मैचों का आयोजन लगातार अंतराल पर होता है तो शायद घरेलू क्रिकेट में भी बहु-दिवसीय टूर्नामेंट का आयोजन शुरू होगा।

गुलाबी गेंद के साथ अभ्यास का अभाव होने के बावजूद मिताली को अपनी खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा है कि वह अच्छा प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने कहा कि वनडे मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद टीम में काफ़ी आत्मविश्वास है। मिताली का मानना है कि इस साल ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के दौरों पर टेस्ट मैच का आयोजन इस फ़ॉर्मैट में भारत के भविष्य के लिए उत्साहजनक संकेत है। साथ ही उन्होंने भविष्य में घरेलू परिस्थितियों में टेस्ट मैच के आयोजन का स्वागत किया। भारतीय कप्तान ने कहा, घर पर टेस्ट खेलना भी काफ़ी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इससे हमें फ़ायदा होगा और लड़कियों को भी घर पर टेस्ट खेलने का अनुभव मिलेगा।

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