भारत और चीन के तेल खरीदने से रूस को हो रहा जबरदस्त फायदा, जानिए कैसे?

भारत और चीन भारी मात्रा में रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहा है। हालांकि रूस से तेल खरीदने से भारत और चीन को भी फायदा हो रहा है।

राज एक्सप्रेस। यूक्रेन से जंग करने को लेकर जहां एक तरफ पश्चिमी देशों ने रूस से मुंह मोड़ लिया है, वहीं ऐसे मुश्किल समय में भी भारत और चीन मजबूती से रूस के साथ खड़े हैं । पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद दोनों देशों ने अभी तक इस मामले में रूस के खिलाफ स्टैंड नहीं लिया है। युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था को खासा नुकसान हुआ है, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में भारत और चीन भारी मात्रा में रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहा है। हालांकि रूस से तेल खरीदने से दोनों देशों को भी फायदा हो रहा है, लेकिन ऐसे समय में जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए हो तब भारत और चीन का तेल खरीदना रूस को बड़ी राहत दे रहा है।

कितना हुआ आयात?

दरअसल पिछले कुछ समय से भारत लगातार रूस से तेल खरीदने की मात्रा बढ़ा रहा है। अगस्त महीने में रूस ने भारत को प्रति दिन 855,950 बैरल कच्चा तेल निर्यात किया गया। इसी के साथ रूस, भारत को कच्चा तेल निर्यात करने के मामले में तीसरा बड़ा देश बन गया है। वहीं चीन के आंकड़ों के अनुसार, उनके द्वारा रूस से हो रहा कच्चे तेल का आयात ​मई दौरान 84.2 लाख टन पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि साल 2021 में चीन रूस से औसतन 16 लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीद रहा था।

दोनों देशों के बीच बड़ा व्यापार :

यूक्रेन में जंग छेड़ने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस से अपने व्यापार में कमी लानी शुरू कर दी। ऐसे मुश्किल समय में रूस को अपना सामान बेचने के लिए बड़े बाजार की जरूरत थी, जिसे भारत ने पूरा किया। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि साल 2021 में भारत का रूस से आयात 2.5 अरब डॉलर था, जो युद्ध के बाद साढ़े तीन गुना बढ़कर 8.6 अरब डॉलर हो गया है।

रूबल को बचाया :

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद रूस की मुद्रा रूबल अगर डॉलर के मुक़ाबले दुनिया की सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली करेंसी बनी तो इसमें भारत का बड़ा योगदान है। दरअसल रूस से भारी-भरकम तेल खरीदने के बदले भारत उसे रूबल में भुगतान करता है। इससे रूस की मुद्रा रूबल को मजबूती मिली।

रुपए में होगा व्यापार :

भारत और रूस के बीच आने वाले समय में रुपए में व्यापार करने पर भी समझौता बनते दिखाई दे रहा है। भारतीय स्टेट बैंक भी इस प्रकिया का हिस्सा बनने पर सहमत हो गया है। अगर यह समझौता हो गया तो भारत से किसी भी चीज का आयात करने पर रूस रुपए में भुगतान कर पाएगा। इससे रूस को भी फायदा होगा और रुपए के अंतर्राष्ट्रीयकरण में भी यह बड़ा कदम साबित होगा।

रूस ने की थी भारत की मदद :

दरअसल दुनियाभर के दबाव के बावजूद भारत इतनी मुश्किल समय में रूस का साथ इसलिए दे रहा है, क्योंकि इसके पीछे दोनों देशों का इतिहास है। दरअसल साल 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद करने के लिए अपनी नौसेना के सातवें बेड़े को बंगाल की खाड़ी की ओर भेज दिया। ऐसे मुश्किल समय में रूस ने भारत से दोस्ती दिखाते हुए अपनी परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियों और विध्वंसक जहाजों को प्रशांत महासागर से हिंद महासागर की ओर भेज दिया। इससे अमेरिका कुछ नहीं कर पाया और युद्ध में पाकिस्तान की हार हुई।

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