विदेश मंत्री एस.जयशंकर 3 दिन के यूरोप दौरे में
विदेश मंत्री एस.जयशंकर 3 दिन के यूरोप दौरे में Social Media

विदेश मंत्री जयशंकर ने फिर रखा विदेशी मंच पर बेबाकी से भारत का पक्ष, भारत–पाकिस्तान युद्ध पर कही बड़ी बात

विदेश मंत्री एस.जयशंकर 3 दिन के यूरोप दौरे पर हैं।ऑस्ट्रियाई पब्लिक ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए उन्होंने निडरता और तेज तेवर के साथ भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और युद्ध समेत कई विषयों पर बात करी।

राज एक्सप्रेस। विदेश मंत्री एस.जयशंकर 3 दिन के यूरोप दौरे पर हैं। अभी फिलहाल वह ऑस्ट्रिया देश में हैं। विदेश मंत्री जयशंकर हमेशा बेबाकी से विदेश मंच पर भारत का पक्ष रखने के लिए जाने जाते है, चाहे वो पाकिस्तान का मुद्दा हो, पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद का मुद्दा हो या यूरोप को उसकी गलतियां बताने का मुद्दा हो, मंत्री जयशंकर ने हर बार बेबाकी से अपनी सरकार और भारत का पक्ष रखा है। ऐसे ही इस बार के यूरोप दौरे के दौरान ऑस्ट्रियाई पब्लिक ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए उन्होंने निडरता और तेज तेवर के साथ भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और युद्ध समेत कई विषयों पर बात करी। पिछले 27 वर्षों में भारत की ओर से यह पहली विदेश मंत्री स्तर की ऑस्ट्रिया यात्रा थी।

भारत–पाकिस्तान मुद्दे पर बोले जयशंकर :

जयशंकर से पत्रकार ने सवाल किया कि कुछ दिन पहले उनका पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र बताना क्या कूटनीतिक रूप से सही हैं? जिस पर जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि "राजनयिक (Diplomat) होने का यह मतलब नहीं कि आप सच नहीं बोल सकते हैं। भारत के साथ जो कुछ भी पाकिस्तान की वजहों से हो रहा है उसके हिसाब से एपीसेंटर (आतंकवाद का केंद्र) शब्द सबसे ज्यादा कूटनीतिक हैं"।

उन्होंने आगे जवाब में भारत पर हुए आतंवादी हमलों का भी जिक्र किया जिसमे उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वही देश है, जिसने कुछ साल पहले भारत की संसद पर हमला किया था, मुंबई शहर पर बॉम्ब ब्लास्ट किए थे और आए दिन भारत–पाकिस्तान सीमाओं से आतंकवादी भेजता आया है। इससे पहले जयशंकर ने सोमवार को एक पत्रकार से वार्ता के दौरान पाकिस्तान को ’आतंकवाद का एंबीसेडर' कह दिया था।

भारत-पाकिस्तान युद्ध के सवाल पर जवाब :

इसके बाद पत्रकार ने जयशंकर से भारत–पाकिस्तान के युद्ध पर सवाल किया जिस पर जयशंकर ने कहा कि "मुझे लगता है कि दुनिया को आतंकवाद को लेकर चिंतित होना चाहिए। दुनिया को इस बात को लेकर परेशान होना चाहिए कि आतंकवाद पनप रहा है और वह मुँह फेरे बैठी है। दुनिया को अक्सर ऐसा लगता है कि अगर ये मेरे घर में नहीं हो रहा है तो ये किसी दूसरे व्यक्ति की समस्या है ऐसे में मुझे लगता है कि दुनिया को इस बात के प्रति चिंतित होना चाहिए कि वह कितनी ईमानदारी और मज़बूती के साथ आतंकियों की चुनौती का सामना करती है।"

रूस के भारत के पुराने और करीबी रिश्ते पर जवाब :

जयशंकर से सवाल किया गया कि भारत अपने अहम सैन्य हथियार रूस से लेता है, क्या इसी वजह से भारत, रूस की यूक्रेन में युद्ध को लेकर आलोचना नहीं करता है? जिस पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि "ऐसा कुछ नहीं हैं। रूस से भारत के रिश्ते काफी पुराने है और यह उस समय बने थे जब पश्चिमी देश जो खुद को लोकतांत्रिक बताते हैं, तानाशाही देश पाकिस्तान को हथियार सप्लाई कर रहे थे लेकिन भारत को खुद की सुरक्षा के लिए भी हथियार नहीं मिल रहे थे।"

भारत का रूस–यूक्रेन युद्ध पर पक्ष रखने के सवाल का जवाब :

जयशंकर से अगला सवाल पूछा गया कि क्या भारत ऐसे युद्ध में निष्पक्ष रह सकता है जिसमे एक पक्ष पूर्णता जिम्मेदार हो? जिस पर जयशंकर ने कहा कि यह बिलकुल हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे कई उदाहरण दे सकते है जिसमे एक देश ने दूसरे देश की अधिपत्य पर हमला किया है। उन्होंने यूरोप पर तंज मारते हुए कहा कि अगर उन्होंने ऐसे उदाहरण यूरोप के दिए तो शायद उन्हें लंबी चुप्पी साधनी पड़ सकती हैं। जयशंकर ने उद्धरण के तौर पर अमेरिका और इराक के खाड़ी युद्ध की बात कही जिसमे अमेरिका के इराक के अधिपत्य पर हमला करने के बावजूद यूरोप के देशों ने अमेरिका का समर्थन किया था।

रूसी तेल के आयात पर जवाब :

ऑस्ट्रियाई पत्रकार ने जयशंकर से रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल आयात पर सवाल किया गया, जिसमे उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि यूरोप ने भारत से 6 गुना ज्यादा तेल आयात किया हैं। उन्होंने यूरोपी देशों पर वापिस से तंज मारते हुए कहा कि जब आप लोग, अपनी जनता, जिसकी औसत प्रतिव्यक्ति आए 60 हज़ार यूरो है, युद्ध के बाद जनता को लेकर इतने संवेदनशील है तो हमारा देश जिसकी प्रतिव्यक्ती आए 2 हज़ार अमेरिकी डॉलर है उसे ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए। हमे भी अपनी जनता की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करना है और हम ऊर्जा के लिए भरी कीमत नहीं दे सकते हैं। उन्होंने यूरोपी देशों पर आगे तंज मारते हुए कहा कि "अगर बात सिद्धांत की है तो 25 फरवरी को जब युद्ध शुरू हुआ था, तभी बेन कर देना चाहिए था। भारत का रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद से ही भारत का रूस से तेल आयात बढ़ चुका है जो की पहले सऊदी अरब और इराक जैसे मूल से होता था।"

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में सुधार पर बोले जयशंकर :

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में धीमी गति से सुधार को लेकर पश्चिमी देशों को निशाने साधते हुए कहा कि "दुनिया का एक सबसे ज्यादा आबादी वाला देश संयुक्त राष्ट्र का स्थाई हिस्सा नहीं है, यह संयुक्त राष्ट्र के बारे में क्या बताता हैं? जो भी देश स्थाई सदस्यता का लाभ उठा रहे है उन्हे संयुक्त राष्ट्र में सुधार को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं हैं।" उन्होंने आगे कहा कि उन्हें लगता है कि सुधार में थोड़ा वक्त लगेगा, क्योंकि हम अकेले नहीं है जो संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग कर रहे है, ऐसे और भी स्थाई और अस्थाई देश भी मांग कर रहे हैं। जयशंकर ने बताया कि यह संयुक्त राष्ट्र संस्था को 1945 में बनाया गया था और अब 2023 है, लेकिन अभी भी इस संस्था में पूरे अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देश की आज भी संस्था में हिस्सेदारी बेहद कम है जिसे ठीक करना होगा।

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