शी जिनपिंग का चीन में विषमता दूर करने और सबके लिए सामान्य समृद्धि पर जोर
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शी जिनपिंग का चीन में विषमता दूर करने और सबके लिए सामान्य समृद्धि पर जोर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश में विषमता दूर करने और इस शताब्दी के मध्य तक देश के सभी नागरिकों को 'समृद्धि के एक सामान्य स्तर' तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश में विषमता दूर करने और इस शताब्दी के मध्य तक देश के सभी नागरिकों को 'समृद्धि के एक सामान्य स्तर' तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उन्होंने सम्पत्ति कर व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर बल दिया है।

जिनपिंग ने चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की द्वैमासिक पत्रिका 'कियूशी' में एक लेख में कहा कि सरकार को सामाजिक कल्याण को लेकर 'सीमा से बढ़ कर' वायदे नहीं करने चाहिए। उन्होंने लिखा है कि सम्पत्ति की विषमता दूर करने के लिए सम्पत्ति कर व्यवस्था में बहुप्रतीक्षित सुधार जरूरी हैं।

गौरतलब है कि चीन साम्यवादी व्यवस्था वाला देश है पर देश में विषमता बहुत बढ़ी है। पिछले तीन दशक में उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करने और सम्पत्ति सृजन के लिए नियंत्रित बाजारवादी आर्थिक नीतियों के बीच में आम लोगों को सस्ती मजदूरी और वेतन पर खूब काम करने के लिए दबाव में रखा गया।

राष्ट्रपति श्री जिनपिंग ने इस लेख में सम्पत्ति कर में सुधार के लिए 'शक्ति और दृढ़ता के साथ' कदम बढ़ाए जाने पर बल दिया है। देश में दशकों से सम्पत्ति कर सुधार की बात चल रही है पर स्थानीय सरकारें और कंपनियों के शेयरधारकों के प्रतिरोध के कारण गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही है। उनका मानना है कि इससे सम्पत्तियों का बाजार लुढ़क जाएगा।

चीन के सम्पत्ति बाजार में सट्टेबाजी का जोर है। वहां भू-सम्पत्ति विकास कंपनी चाइना एवरग्रेड समूह इस समय कर्ज में डूब रही है। इससे दुनिया की निगाह वहां की सट्टेबाजी पर केंद्रित है। माना जा रहा है कि सम्पत्ति कर प्रणाली में सुधार से सट्टेबाजी पर अंकुश लगेगा। श्री जिनपिंग ने जनता को कल्याणकारी योजनाओं के ऊंचे सपने दिखाने के प्रति आगाह किया है।

उन्होंने इसकी बजाय सम्पत्ति की विषमता दूर किए जाने और इस शताब्दी के मध्य तक सबके लिए सम्पत्ति का एक सामान्य स्तर प्राप्त किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा है कि इस शताब्दी के मध्य तक लोगों की आय और उपभोग के बीच के अंतर को एक तर्कसंगत स्तर तक घटाने की जरूरत है।

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