कोविड-19 ने बताया 19-20 का फर्क, R&D ईयर होगा 2021
साल 2021 में दुनिया का खास फोकस अनुसंधान और विकास पर रहने वाला है।Syed Dabeer Hussain - RE

कोविड-19 ने बताया 19-20 का फर्क, R&D ईयर होगा 2021

2020 की शुरुआत जनवरी में सीएए और एनआरसी के विरोध में अड़ीं महिलाओं के प्रदर्शन से हुई तो इसका अंत किसान बिल के विरोध से होने जा रहा है।

हाइलाइट्स –

  • कोविड की भेंट चढ़ा 2020

  • 2021 रहेगा सुधार का साल

  • भारत में व्यापक सुधार की दरकार

राज एक्सप्रेस। कोविड-19 के नाम रहे साल 2020 ने 19-20 के गणितीय फेर को जिस तरह समझाया है उससे तय है कि आने वाले साल 2021 में दुनिया का खास फोकस अनुसंधान और विकास पर रहने वाला है।

कोविड 19 के कारण वर्ष 2020 में पूरी दुनिया की चिकित्सा, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और तमाम बुनियादी व्यवस्थाओं में जो कमियां उजागर हुई हैं उसमें सुधार की 2021 के दौरान सरकारों पर बड़ी जिम्मेदारी होगी।

ऐसे बीता साल 2020-

साल 2020 के दौरान भारत की वो प्रमुख घटनाएं जिसने बदल दिया लोगों के सोचने, जीने, समझने का अंदाज।

“दिल्ली से शुरू दिल्ली पर खत्म” -

देश की राजधानी दिल्ली में 2020 का आगाज सीएए और एनआरसी के विरोध के साथ हुआ। शाहीन बाग प्रदर्शन बाद में दंगे की शक्ल अख्तियार करता दिखा। फरवरी के अंतिम सप्ताह के दौरान दिल्ली के उत्तर पूर्वी हिस्से में दंगों की खबरें सुर्खियां बनीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटनाक्रम में आधा सैकड़ा से ज्यादा लोगों की जान गई बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।

“दिल्ली से शुरू दिल्ली पर खत्म” इसलिए क्योंकि साल 2020 की शुरुआत कड़ाके की ठंड के बीच शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी के विरोध में अड़ीं महिलाओं के प्रदर्शन से हुई तो इसका अंत दिसंबर में किसान बिल के विरोध में किसानों के शांति पूर्ण प्रदर्शन से होने जा रहा है।

कोरोना की एंट्री -

सीएए और एनआरसी के विरोध के बीच उपजे वैमनस्य और असंतोष पर होली के रंगों की फुहार पड़ती कि; इस बीच पूरी दुनिया में खौफ का पर्याय बन चुके कोरोना वायरस के भारत में भी अपनी आमद दर्ज कराने से देश वासियों को न चाहकर भी सामाजिक दूरी (social distancing) अख्तियार करना पड़ी।

भारत में कोरोना के मामले जनवरी में सामने आ गए थे, जबकि मार्च के दौरान कर्नाटक में पहली मौत दर्ज हुई। अब तक देश में एक करोड़ से ज्यादा लोग खौफनाक कोरोना वायरस डिजीज (कोविड-19, covid-19) की जद में आ चुके हैं। साथ ही एक लाख 48 हजार से अधिक लोगों की मौत कोविड 19 से हो गई है।

बैंकिंग कारोबार पर सवाल-

प्राइवेंट बैंकिंग के लिहाज से भारत में साल 2020 काफी निराशाजनक रहा। यस बैंक के खाता धारकों से भली तरह इस सच को भला और कौन बता सकता है। इस बड़े प्राइवेट बैंक के अचानक संकट में आने से मार्च 2020 के शुरुआती सप्ताह में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यस बैंक पर कुछ पाबंदियां लगाईं।

बैंक में जमा खुद की अमानत में से एक महीने में 50 हजार रुपये से ज्यादा नहीं निकाल पाने की बेबसी खाता धारकों ने बयां की। पीएमसी बैंक में भी ऐसी की कमियां उजागर होने से प्रतिबंध लगे जिसकी सजा खाता धारकों को भुगतनी पड़ी।

पलायन की बेबसी -

भारत में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस महामारी के मामलों की रोकथाम के मकसद से 25 मार्च को देश में 21 दिन का पूर्ण लॉकडाउन लागू हुआ। इस तालाबंदी में ट्रेन, बस और हवाई जहाज सेवाएं रुकीं तो आम जनजीवन भी थम गया।

कोरोना ने पीढ़ी को साल 2020 में 1947 की तब याद दिला दी जब लॉकडाउन के कारण बड़े शहरों में काम करने वालों का रेला अपने गांवों को पैदल ही रवाना हुआ। इस दौरान सड़कों पर भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर की स्थिति नजर आई।

भूख, प्यास से बेहाल पलायन करने वालों को तपती सड़क और रेलवे ट्रैक की मरीचिका में घर नजर आ रहा था। अपने ही देश में पलायन का दंश तब और असहनीय हो गया जब मई महीने में महाराष्ट्र के औरंगाबाद रेलवे ट्रैक पर मजदूरों की मौत मालगाड़ी की चपेट में आने से हो गई। अधिक पढ़ने शीर्षक पर क्लिक-स्पर्श करें। - MP के शराब कारोबारी ने 4 लोगों के लिए बुक किया 180 सीटर प्लेन

गवाह बना मार्च -

भारतीय कानून के इतिहास में 20 मार्च 2020 का दिन मानवीय मूल्यों की रक्षा में अति महत्वपूर्ण रहा। इस दिन निर्भया केस के चारों दोषियों पवन, मुकेश, अक्षय और विनय को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई।

MP में कमल -

मध्य प्रदेश की राजनीति साल 2020 में बड़ी उलटफेर का गवाह बनी। तीन बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हराकर सालों बाद कांग्रेस की सरकार बनाने वाले कमलनाथ बतौर सीएम अपनी पारी लंबी नहीं खींच पाए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने 22 समर्थकों के साथ जब कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया तो एमपी में कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई। कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से 20 मार्च को इस्तीफा दिया जिससे शिवराज सिंह का चौथी बार मुख्यमंत्री बनना तय हो गया।

मार्च मेें शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस बीच सिंधिया भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आ गए। कहते भी हैं एमपी गजब है।

अम्फान तूफान -

कोरोना संकट के साथ ही बंगाल की खाड़ी में आए अम्फान तूफान ने भारत के पूर्वी हिस्से पश्चिम बंगाल को झकझोर दिया। अम्फान तूफान से वेस्ट बंगाल में 13.9 बिलियन डॉलर का नुकसान होने की बात प्रदेश सरकार ने कही। तूफान से करीब 30 हजार घरों और लगभग 88 हजार हेक्टेयर भूमि की फसल को नुकसान पहुंचा।

टिड्डी दल की ताकत -

पूर्वी हिस्से में अम्फान तूफान ने कहर बरपाया तो उत्तरी इलाकों में पाकिस्तान से आई टिड्डियों की फौज ने नुकसान किया। टिड्डी दल के हमले से राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में फसल बड़े पैमाने पर बर्बाद हुई।

ड्रैगन पर शिकंजा -

जून महीने के पहले पखवाड़े की एक रात लद्दाख बॉर्डर पर घुसने की हिमाकत कर रहे चीन के सैनिकों को भारतीय सेना ने बड़ा सबक सिखाया। सेना की कार्रवाई में 20 भारतीय जवान शहीद हुए जबकि चीन के करीब 40 सैनिक मारे गए, हालांकि चीन इस पर पर्दा डालता रहा।

चालाक चीन के लगातार बदल रहे तेवर के कारण भारत सरकार ने चीन पर सख्ती दिखाते हुए भारतीय हित में एक सैकड़ा से अधिक चीनी ऐप्लिकेशंस को बैन कर दिया। इसके साथ ही आत्म निर्भर भारत की बुनियाद बुनने इंडिया में चाइनीज उत्पादों का बहिष्कार शुरू हुआ। भारत के दिवाली मार्केट में चीन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

यूएनएससी में भारत -

कोरोना, अम्फान तूफान और चीन टैंशन के बीच जून में भारत के लिए सुखद खबर भी आई। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC- यूएनएससी) यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को 8वीं बार अस्थायी सदस्य चुना गया। इस दौरान हुए मतदान के 192 वोटों में से भारत के पक्ष में 184 वोट पड़े।

राफेल की ताकत -

जुलाई में भारत ने फ्रांस से पांच लड़ाकू विमान राफेल मंगाए जिससे भारतीय वायु सेना की ताकत में इजाफा हुआ। इन लड़ाकू विमानों को सितंबर में आधिकारिक तौर पर इंडियन एयर फोर्स में शामिल किया गया। इसके बाद नवंबर में तीन और राफेल विमानों की खेप भारत पहुंची। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमानों का सौदा किया है।

एसएसआर VS बॉलीवुड -

साल 2020 सपनों की दुनिया कहे जाने वाले बॉलीवुड के लिए हकीकत में बुरे दौर से गुजरा। इस वर्ष ऋषि कपूर और इरफान खान समेत बॉलीवुड के कई मंजे हुए कलाकार दुनिया से विदा हो गए। सबसे ज्यादा चर्चा में रही एसएसआर यानी सुशांत सिंह राजपूत की मौत।

आत्महत्या, हत्या की आशंकाओं के बीच सुशांत डेथ मिस्ट्री वंशवाद, ड्रग्स की गलियों से होकर गुजरी। इसमें सुशांत की कथित गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती से तो पूछताछ हुई ही, ड्रग्स पैडलर्स के बयानों के आधार पर तमाम छोटे-बड़े कलाकारों से भी पुलिस ने सवाल किये।

कानपुर का बिकरू कांड -

जुलाई में कानपुर का बिकरू गांव तब अचानक सुर्खियों में आया जब कुख्यात बदमाश विकास दुबे ने अपने साथियों संग पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला कर दिया। इस हमले में सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हुए। मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार विकास को पुलिस ने कानपुर के पास भागने की कोशिश करते वक्त मार गिराया।

राम मंदिर शिलान्यास -

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 के दौरान अयोध्या के राम मंदिर मामले का पटाक्षेप कर दिया था। इसके आधार पर तमाम तैयारियों के बीच उत्साह के साथ राम मंदिर की नींव साल 2020 के अगस्त महीने में रखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास किया।

बिहार विधान सभा चुनाव -

बिहार विधानसभा चुनाव कोरोना संकट के लिहाज से भी खास रहे। महामारी के संकट के बीच देश में यह पहली लोकतांत्रिक प्रक्रिया थी। बिहार चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी तो रही राजद लेकिन भाजपा की मदद से जदयू ने लगातार चौथी बार सरकार बनाई।

नहीं हुआ खेलों का महाकुंभ -

खेलों का महाकुंभ ओलंपिक 2020 में जापान की राजधानी टोक्यो में प्रस्तावित था। साल 2008 के बाद ओलंपिक का आयोजन एशिया में होने की संभावनाओँ पर कोरोना के ग्रहण लग गए जिससे ओलंपिक को आगे बढ़ा दिया गया।

आईसीसी वर्ल्ड टी-20 -

इसी कड़ी में आईसीसी टी-20 विश्व कप साल 2020 में होना था। कई खिलाड़ी इस महाप्रतियोगिता के बाद सन्यास लेना चाहते थे लेकिन कोरोना के कारण टूर्नामेंट आगे सरकने से उनके रिटायरमेंट प्लान प्रभावित हुए। धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद अगस्त 2020 में वनडे और T20 क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया।

यूएई में हुआ आईपीएल -

कोरोना वायरस महामारी के कारण बीसीसीआई ने खेल-खिलाड़ी और दर्शकों की सुरक्षा के लिए आईपीएल का 13वां सीजन संयुक्त अरब अमीरात में कराने का फैसला किया। आईपीएल के 13वें सीजन में मुंबई इंडियन ने रोहित शर्मा की कप्तानी में पांचवां आईपीएल खिताब अपने नाम किया।

कोरोना का रोना -

कोरोना वायरस जनित विश्व व्यापी मंदी के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी ढीली पड़ी। जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की जीडीपी में अप्रैल से जून महीने की तिमाही में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों ने इस गिरावट की स्थिति को साल 1996 के जीडीपी आंकड़ों के मुकाबले बहुत खराब आंका।

किसान बिल पर पेंच –

खेती-किसानी के तरीकों, नीतियों में सुधार बताकर केंद्र सरकार ने जो कृषि कानून तैयार किए उनका लगातार विरोध जारी है। पंजाब समेत कई राज्यों के किसान इस वक्त दिल्ली की सीमाओं पर एकत्रित होकर कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

बाजार का गणित -

कोरोना जनित मंदी के कारण अर्थव्यवस्था जरूर प्रभावित हुई, लेकिन भारतीय शेयर बाजार ने इतिहास में कामयाबी की नई इबारत भी दर्ज कराई। कोविड-19 काल में सेंसेक्स अपने सर्वोच्च स्तर 46 हजार 890 पर पहुंचा तो निफ्टी ने भी 13 हजार 740 अंकों को छुआ।

कोरोना संकट काल में सोना-चांदी की कीमतों में भी तेजी आई। इस साल प्रीसियस मैटल गोल्ड ने 56 हजार 191 रुपया प्रति 10 ग्राम, जबकि चांदी ने 77 हजार 949 रुपया तक के अधिकतम दाम की ऊंचाई हासिल की।

दुनिया में 2020 -

भारत समेत साल 2020 में अंतर राष्ट्रीय स्तर पर घटित हुईं कई बड़ी घटनाओं ने भी दुनिया का ध्यान आकृष्ट किया।

चीन का वुहान -

साल 2020 की शुरुआत में चीन से निकला एक वायरस अन्य राष्ट्रों के लिए चुनौती बन गया। इससे निपटने के लिए 30 जनवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की।

इटली में चीन से पहुंचे दो पर्यटकों संक्रमित थे। मार्च तक इटली में कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा चीन से अधिक था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बीच यूरोप को कोरोना का एक्टिव सेंटर घोषित कर दिया।

मार्च में जारी आंकड़ों के अनुसार संक्रमितों की संख्या के मामले में अमेरिका ने चीन और इटली को पीछे छोड़ दिया। अमेरिका में कोरोना संक्रमण के डेढ़ करोड़ से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

कासिम सुलेमानी की हत्या -

जनवरी में इराक में बगदाद हवाई अड्डे पर अमेरिकी हवाई हमले में कासिम सुलेमानी की मौत हो गई। सुलेमानी ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य कमांडर और खुफिया प्रमुख मेजर जनरल में से एक रहे। अमेरिका ने सुलेमानी पर हमले का कारण बताते हुए कहा था कि वह अमेरिकी प्रतिष्ठानों और राजनयिकों पर हमला करने की साजिश में लिप्त थे।

फ्लॉयड की मौत पर प्रदर्शन -

मई के महीने में अमेरिका के मिनेपोलिस शहर में एक अश्वेत सिक्योरिटी गार्ड जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो जमकर वायरल हुआ। पुलिस कार्रवाई के तरीके का पूरे अमेरिका में जोरदार विरोध हुआ। अस्पताल में फ्लॉयड की मौत हो गई।

जॉर्ज की मौत के बाद सरकार पर रंगभेद के आरोप लगे, शहर में बवाल हुआ, कई दुकानों में लूटपाट हुई। इस हिंसक विरोध प्रदर्शन में करीब 19 लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट्स सामने आई, 1400 से ज्यादा अरेस्ट हुए। बताया गया कि हिंसा के कारण 500 मिलियन यूएस डॉलर की संपत्ति को नुकसान हुआ।

जापानी पीएम ने छोड़ी सत्ता -

जापान (Japan) के प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) ने अगस्त में स्‍वास्‍थ्‍य विषयक कारणों का हवाला देकर अपने पद से इस्‍तीफा देने का ऐलान किया। इस घोषणा के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की होड़ देखी गई।

कार्टून से हुई हिंसा! -

सितंबर में फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक पत्रिका 'शार्ली हेब्दो' (Charlie Hebdo) के पैगंबर मोहम्मद संबंधी विवादास्पद कार्टून पर फिर से विवाद शुरू हो गया। दरअसल मैग्जीन के कार्यालय में 2015 के दौरान की गई फायरिंग में 12 लोग मारे गए थे। इस मामले में सितंबर 2020 से ट्रायल शुरू होना था।

मैगजीन के संस्करण में प्रकाशित कार्टून को लेकर सारा बखेड़ा शुरू हुआ। एक पाकिस्तानी युवक पर पत्रिका के पूर्व कार्यालय के बाहर दो लोगों पर चाकू से हमला कर घायल करने के भी आरोप लगे।

ट्रंप हारे, बाइडेन जीते -

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन (Joe Biden) ने रिपब्लिकन पार्टी के अपने प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को मात दे दी। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने से पहले बाइडेन पूर्व उपराष्ट्रपति भी रहे। भारतवंशी सीनेटर कमला हैरिस अमेरिका में उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित होने वाली पहली महिला हैं।

अगला दशक -

आगामी साल 2021 के साथ ही शुरू हो रहे नए दशक में कोरोना के कारण सामने आईं खामियों को सुधारने का लक्ष्य सामने होगा। एक तरह से साल 2021 को आरएंडडी ईयर कहा जा सकता है।

दरअसल अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था की चादर में कोरोना संकट से उभरे छेदों में पैबंद लगाने के लिए सभी देशों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D- आरएंडडी) यानी अनुसंधान और विकास पर फोकस करना होगा ताकि आगे ऐसी आपात आपदाओं से निपटने के लिए मनुष्य जाति को तैयार किया जा सके।

डिस्क्लेमर – आर्टिकल प्रचलित रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें शीर्षक-उप शीर्षक और संबंधित अतिरिक्त प्रचलित जानकारी जोड़ी गई हैं। इस आर्टिकल में प्रकाशित तथ्यों की जिम्मेदारी राज एक्सप्रेस की नहीं होगी।

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