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International Media Reaction |Kavita Singh Rathore -RE
दुनिया

अयोध्या में मंदिर बनने के फैसले पर दुनियाभर की मीडिया का रिएक्शन

अयोध्या का फैसला आने के बाद सभी ने अपनी कोई न कोई प्रतिक्रिया जरूर दी है, इस मामले पर इंटरनेशनल मीडिया का क्या रिएक्शन रहा, चलिए इस पर एक नजर डालें।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

हाइलाइट्स :

  • कल आ ही गया अयोध्या मंदिर विवाद का फैसला

  • दुनियाभर की मीडिया का रिएक्शन

  • अधिकांश मीडिया ने इस फैसले की तारीफ की

  • बड़े चैनल्स का रिएक्शन

राज एक्सप्रेस। बहुत सालों से चल रहे अयोध्या मंदिर विवाद का फैसला आखिर कल आ ही गया, जिसका पूरे भारत को बेसब्री से इंतजार था, कल अर्थात 9 नबम्बर 2019 को देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया। जिसके बाद से हर कोई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है, इतना ही नहीं ऐसे मामलो पर सबसे ज्यादा लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव नजर आते हैं। ऐसे में भारत से जुड़े मुद्दों में से एक अह्म मुद्दे पर दुनियाभर की मीडिया (International Media) का क्या रिएक्शन रहा। एक नजर डालें।

अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया का रिएक्शन :

यदि आप एक नजर दुनियाभर की मीडिया के रिएक्शन पर डालते हैं तो, पाएंगे कि, अधिकांश मीडिया ने इस फैसले की तारीफ ही की है और कोर्ट के फैसले को सही बताया है। इनमें कुछ बड़े चैनल्स जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट, द गार्डियन, अमेरिकी मीडिया, येरुशलम पोस्ट और बीबीसी के नाम शामिल हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स का रिएक्शन :

न्यूयॉर्क टाइम्स एक बड़ा मिडिया प्लेटफॉर्म है, उसने अपनी हेडलाइन द्वारा कहा कि,

‘भारतीय अदालत ने अयोध्या धार्मिक स्थल का फैसला हिंदुओं के पक्ष में दिया’
न्यूयॉर्क टाइम्स

वहीँ न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, “फैसला आने से पहले दक्षिणपंथी हिंदुओं का कहना था कि, भारत के लोग कई सदियों तक पहले मुगलों और फिर अंग्रेजों की गुलामी में रहे है, इस फैसले से भारत के लोगों को उनका राष्ट्र वापस मिलने की पुष्टि होगी, साथ ही मुसलमानों में यह डर भी है कि इस फैसले से उन्हें अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक न मान लिया जाए और फिर अतिवादी हिंदुओं को ज्यादा महत्व मिलेगा।

फैसला आ गया है, जिसमे हिंदुओं को मंदिर बनाने की इजाजत मिल गई है। 1992 में जब बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तबसे ही मंदिर निर्माण एक मुद्दा बना हुआ था। हिंदुओं का मानना है कि, विवादित जगह भगवान राम की जन्मभूमि है और मुगल शासक ने मंदिर तोड़कर वहां मस्जिद बनवाई थी।”

वाशिंगटन पोस्ट का रिएक्शन :

वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी हेडलाइन द्वारा कहा,

"भारत के सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे विवादित जगह पर हिंदू मंदिर बनाने की अनुमति दे दी"

वाशिंगटन पोस्ट

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, “राम मंदिर का निर्माण करना भारत की सरकार BJP का लंबे समय से चला आ रहा लक्ष्य था। इस जगह को लेकर हिन्दुओं की मान्यता है कि, यह स्थल भगवान राम की जन्मभूमि है और वह इसे पूजते हैं, लेकिन यहां 16वीं सदी में बाबर द्वारा बाबरी मस्जिद का निर्माण किया था, जिसे 1992 में तोड़ दिया गया था।

वाशिंगटन पोस्ट ने अपने अखबार में लिखा :

वाशिंगटन पोस्ट ने अपने अखबार में लिखा कि, अदालत ने फैसला दिया है कि, ध्वस्त मस्जिद स्थल पर हिंदू मंदिर बन सकता है। वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद यह एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों ने स्वीकार करने की बात कही थी। इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी जीत के रूप में भी देखा जाएगा।

द गार्डियन का रिएक्शन :

द गार्डियन ने अपनी हेडलाइन द्वारा कहा,

“अयोध्या: भारत की उच्च अदालत ने मुसलमानों के दावे वाली जगह हिंदुओं को दी”

द गार्डियन

द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, “सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की सहमति से यह ऐतिहासिक फैसला हुआ कि, इस विवादित जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था। जजों ने अपने फैसले में बताया है कि, जहां 16वीं सदी में मस्जिद बनी थी और मुसलमान जिसके आधार पर इस जगह को अपना बता रहे थे, वह किसी खाली जगह पर नहीं बनी थी। इसके अलावा हिंदुओं की आस्था पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता। वहीँ उन्होंने दिसंबर 1992 में हुए दंगों की बात करते हुए बताया बीजेपी की अगुवाई में भीड़ ने बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया था और उस समय भड़के दंगों में बहुत से मारे गए थे। इस मामले में आज भी बीजेपी के कुछ नेताओं पर मुकदमा चल रहा है।”

अमेरिकी मीडिया का रिएक्शन :

अमेरिकी मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर के फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि, इस फैसले से भारत के राजनीतिक-सामाजिक भू-दृश्य को नई दिशा मिलेगी। वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ ही ज्यादातर अमेरिकी मीडिया द्वारा कोर्ट के इस फैसले को प्रमुखता दी गई है। इतना ही नहीं भारत की कानून-व्यवस्था की पर्याप्त व्यवस्था को लेकर भी अमेरिकी मीडिया ने तारीफ की।

येरुशलम पोस्ट का रिएक्शन :

येरुशलम पोस्ट ने अपना रिएक्शन देते हुए कहा कि, भारत की शीर्ष अदालत ने आखिरकार वही फैसला दिया जो, ऐतिहासिक तथ्यों द्वारा साबित हो सका। कोर्ट ने इस विवादित स्थल को हिंदुओं को मंदिर बनाने के लिए सौंप दिया है। कोर्ट ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह फैसला दिया। इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे देश ने सम्मान दिया है।

बीबीसी का रिएक्शन :

बीबीसी द्वारा बताया गया कि, अयोध्या मंदिर का फैसला भारत के लिए एक बड़ा फैसला था, जो सामने आ गया है। फैसले में कोर्ट ने बाबरी मस्जिद के गुंबद वाले स्थान को हिंदू पक्ष को सौंप दी है। इस बड़े मुद्दे पर 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद फैसला सामने आ ही गया है, लेकिन आने वाले समय में देखा जाएगा कि, दोनों समुदायों में किस तरह से सामंजस्य का वातावरण बनता है।

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