नई मुसीबत: कोरोना काल में अब रेत के बवंडर की तबाही
नई मुसीबत: कोरोना काल में अब रेत के बवंडर की तबाही|Social Media
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नई मुसीबत: कोरोना काल में अब रेत के बवंडर की तबाही

कैरेबियाई देशों में अब रेत के तूफान ने आसमान में तबाही मचाई, जिससे कई दिनों से आसमान में सूरज ही नजर नहीं आ रहा है। अब बड़े रेतीले तूफान का खतरा मंडराया, ये तूफान आम रेत के तूफानों जैसा नहीं...

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

वर्तमान में चीन के वुहान शहर से आई खतरनाक कोरोना वायरस की आपदा पूरी दुनिया के लिए जान की दुश्मन बनी हुई है और लगभग सभी देश इस महामारी के संकट से जूझ रहे हैं, इसी बीच अब दुनिया एक और नई आसमानी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है, क्‍योंकि कैरेबियाई देशों में अब रेत के बवंडर से आसमान में तबाही मचने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।

आसमान में नजर नहीं आ रहा सूरज :

दरअसल, कैरेबियाई देशों में सहारा रेगिस्तान से उड़कर आया रेत का तूफान आया, जिसके कारण यहां कई दिनों से यहां सूर्य का प्रकाश ही नजर नहीं आ रहा है जिससे लोग परेशान हैं। बताया जाता है कि, यहां आसमान में रेत के बवंडर की तबाही कई साल में सबसे घनी रेत की परत है और इसके कारण कुछ इस तरह की स्थिति बनी है-

  • सूरज नजर नहीं आ रहा है।

  • हवा की गुणवत्ता काफी बुरी स्थिति में पहुंच गई।

  • कम विजिबिलिटी के चलते चीजों का दिखना मुश्किल हो गया है।

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार, कैरेबियाई देशों में बीते कई हफ़्तों से पूरा आसमान ढंका हुआ है। कई देशों के आसमान पर अंधेरा छा गया है, रेत ने आसमान पूरी तरह से ढंक लिया है।

रेत तूफान इन देशों में दे चुका दस्तक :

खबर सामने आ रही है कि, रेत तूफान की तबाही का संकट यानी रेत का तूफान अब 8000 किलोमीटर दूर कोरोना से बुरी तरह प्रभावित देश अमेरिका के क्षेत्र प्यूर्तो रिको और सैन जुआन में दस्तक दे चुका है।

वैज्ञानिक डॉक्टर ओलगा मयोल ने बताया :

प्यूर्तो रिको यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिक डॉक्टर ओलगा मयोल ने बताया, "प्यूर्तो रिको में पिछले 15 साल में सबसे घनी धूल के कणों को देखा गया है।" सहारन डस्ट के नाम से जाना जानेवाला रेत के तूफान का ट्वीटर पर एक पोस्ट शेयर किया गया है, जिसमें टेबल, पंखा और कार पर धूल की जमी परतों को देखा जा सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ प्यूर्तो रिको की मौसम विज्ञानी ओल्गा मायोल ने कहा कि, ये एतिहासिक क्षण है, ऐसा करीब 50 सालों में एक बार देखने को मिलता है। कैरेबियाई देशों में तो एयर क्वालिटी काफी बुरी स्थिति में पहुंच गयी है। आश्चर्यजनक है कि, इतनी भारी मात्रा में रेत हजारों किलोमीटर का सफ़र कर सेन्ट्रल अमेरिका तक पहुंचने वाली है। वहीं NERC की मौसम विज्ञानी क्लेयर राइडर का कहना हैं कि, ''आमतौर पर हर साल इस तरह का एक तूफ़ान सहारा के रेगिस्तान से उठता है और समुद्र पार करने के दौरान ही बारिश के चलते ख़त्म हो जाता है।''

इस भारी तबाही के चलते चेतावनी जारी :

वहीं कैरेबियाई देशों में रेत के तूफान से मची तबाही के चलते अधिकारियों ने चेतावनी जारी कर लोगों को धूल से होने वाली श्वसन संबंधी समस्या और एलर्जी के प्रति सावधान रहने को कहा है।

माना जा रहा है कि, रेत का ये तूफान गुरूवार व शुक्रवार तक अमेरिकी शहरों में पहुंचे जाने की अशंका है, वैज्ञानिकों के मुताबिक हवा में रेत की मात्रा सामान्य से ज्यादा होने पर स्वास्थ के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। हालांकि ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि, अभी यह रेत का तूफ़ान हवा के साथ और दूरी तय करेगा और इस रेत के तूफ़ान को 'सहारन डस्ट' की संज्ञा दी गयी है, जो आम रेत के तूफानों जैसा नहीं होता है।

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