Covid-19: कितने वैरिएंट हैं कोरोना के जिनसे हमें बचना चाहिये?
कुछ वैरिएंट को "चिंता का विषय" माना गया है।Syed Dabeer Hussain - RE

Covid-19: कितने वैरिएंट हैं कोरोना के जिनसे हमें बचना चाहिये?

वायरस का कौन सा प्रकार कितना खतरनाक है? बूस्टर शॉट क्या है, क्या इसे लगवाना जरूरी है? राज खास में जानिए कोविड-19 टीकाकरण संबंधी जानकारियां

हाइलाइट्स –

  • कोरोना तेरे रूप अनेक

  • कोविड-19 के वैरिएंट्स की दहशत

  • कितना फायदेमंद है Covid-19 का टीका?

राज एक्सप्रेस। दुनिया में कोरोना वायरस के कई वैरिएंट्स (प्रकार) कहर बरपा रहे हैं। वायरस का कौन सा प्रकार कितना खतरनाक है? बूस्टर शॉट क्या है, क्या इसे लगवाना जरूरी है? राज खास में जानिए कोविड-19 टीकाकरण संबंधी जानकारियां विस्तार से।

क्या यहां और भी वैरिएंट हैं?

क्या यहां वायरस के कई और वैरिएंट्स हैं, जिनसे हमें चिंतित होना चाहिए? इस बारे में अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) यानी सी.डी.सी. (C.D.C.) ने ऐहतियाती कदम उठाए हैं।

रोग नियंत्रण और रोकथाम के लिए केंद्र (C.D.C.) तकरीबन दर्जन भर से ज्यादा वैरिएंट्स पर नजरें गड़ाए हुए है। इनमें से केवल कुछ ही वैरिएंट को "चिंता का विषय" माना गया है।

वायरस का एक अन्य प्रकार जिस पर इस समय स्वास्थ्य विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं वह है B.1.351 वैरिएंट। पहली बार इसकी दक्षिण अफ्रीका में पहचान हुई थी। इसी तरह पी डॉट वन (P.1) या पी वन पहली बार ब्राजील में पहचाना गया।

यहां कैलिफोर्निया के दो वैरिएंट्स B.1.427 एवं B.1.429 और न्यूयॉर्क के संस्करण B.1.526 को मिलाकर और भी दूसरे कई वैरिएंट्स वातावरण में मौजूद हैं।

दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के वैरिएंट्स ने सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाई है। ये वैरिएंट्स मार्च के अंत के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 2 प्रतिशत संक्रमण संबंधी मामलों का कारक बने।

ये वो वैरिएंट्स हैं जिनकी फिलहाल कोडिंग या पहचान हो चुकी है। इनके अलावा नए और वैरिएंट्स का खतरा अभी भी सिर पर मंडरा रहा है, जो कभी भी उभर सकता है। विषय के जानकारों का कहना है कि वायरस के मौजूदा वैरिएंट्स एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते प्रतीत हो रहे हैं।

एक दिलचस्प नया विकास: -

संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में जहां B.1.1.7 प्रमुख तौर पर कहर बरपा रहा है वहां वायरस के नए और ताजा वैरिएंट्स उभर रहे हैं। इससे इसके निदान की दुष्वारियां बढ़ गईं हैं।

चकमा देने में माहिर! -

एक चिंता है कि B.1.351 और P.1 जैसे वैरिएंट अन्य वेरिएंट्स की तुलना में वैक्सीन एंटीबॉडी को चकमा देने में माहिर हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टीके बिल्कुल काम नहीं करते।

इसका कारण यह भी हो सकता है कि, जब टीके ईजाद किए जा रहे थे तब इन वैरिएंट्स की रचना सामने नहीं आई थी। मतलब वायरस के शुरुआती प्रकारों पर टीके की फाइट कम नहीं आंकी जानी चाहिए।

सबसे बड़ी चुनौती -

अब तक पहचाने गए प्रकारों में से B.1.351 अब तक की सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस वैरिएंट का अपना कुंजी उत्परिवर्तन (की म्यूटेशन-key mutation) है। इसे E484K की पहचान प्रदान की गई है। संक्षिप्त में इसे "ईक" (“Eek”) भी कहा जा सकता है।

वैक्सीन से मुझे कितनी सुरक्षा हासिल है?

दक्षिण अफ्रीका में देखे गए पहले वैरिएंट के मुकाबले टीके मुझे कितनी सुरक्षा देंगे? तो इसका जवाब यह है कि हमारे पास अभी तक B.1.351 के खिलाफ वैक्सीन प्रभावशीलता के सटीक अनुमान नहीं हैं। ऐसे में यह अब तक का सबसे चुनौती पूर्ण प्रकार (वैरिएंट) हो सकता है।

अध्ययन बताते हैं कि विभिन्न टीके अभी भी संक्रमण के लिए समग्र जोखिम को कम करते हैं और कोरोना जनित गंभीर बीमारी को रोकने में मददगार हैं।

दक्षिण अफ्रीका में जॉनसन एंड जॉनसन के एक-खुराक वाले टीके के एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि यह गंभीर बीमारी को रोकने में लगभग 85 प्रतिशत प्रभावी है। साथ ही हल्की से मध्यम बीमारी के मामले में भी 64 प्रतिशत तक जोखिम कम हो जाता है। (जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन के वितरण को स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा सुरक्षा चिंताओं की जांच के दृष्टिगत रोक दिया गया है।)

इसी तरह ऐस्ट्राजेनेका वैक्सीन B.1.351 के कारण होने वाली हल्की बीमारी से बचाने के लिए ज्यादा कुछ मदद नहीं करती, लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा है कि वे मानते हैं कि टीके अधिक गंभीर मामलों से बचा सकते हैं।

क्या मुझे टीके की ताकत पर चिंता करना चाहिए?

क्या मुझे अभी भी चिंता होनी चाहिए कि टीके कुछ वेरिएंट के मुकाबले कम प्रभावी हैं? इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि समस्या यह है कि हम प्रभावशीलता के बारे में गलत व्याख्या करते हैं।

जैसे जब कोई यह सुनता है कि "70 फीसद प्रभावकारी", तो वो गलत तरीके से निष्कर्ष निकाल सकता है कि, इसका मतलब टीकाकरण कराने वाले 30 प्रतिशत लोग बीमार हो जाएंगे!

भले ही टीका किसी वैरिएंट के सामने कमतर साबित हो लेकिन इसके बावजूद टीकाकरण के बाद संक्रमित होने वाले लोगों के मुकाबले लोगों का एक बड़ा वर्ग सुरक्षित रहेगा।

क्या मुझे बूस्टर शॉट की जरूरत है?

टीका निर्माता पहले से ही वैरिएंट्स को लक्षित करने वाले बूस्टर शॉट्स विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

"यह स्पष्ट नहीं है कि बूस्टर की कितनी जल्दी जरूरत पड़ सकती है। संभावना है एक समय बूस्टर की सिफारिश करते हुए भी लोगों को देखा जा सकता है। यह बूस्टर व्यक्ति की एंटीबॉडी और उसके स्थायित्व को बढ़ाएगा। संभवतः यह बूस्टर दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील के वेरिएंट को लक्षित करने के लिए तैयार किया जाएगा।"

डॉ. पीटर जे. होटेज़, डीन, नेशनल स्कूल ऑफ़ ट्रॉपिकल मेडिसिन, ह्यूस्टन

टीके से मिलेगी स्वतंत्रता! -

किसी नए वैरिएंट के कहर बरपाने पर टीकाकरण करा चुके व्यक्ति पर संक्रमण का खतरा कम रहेगा। साथ ही गंभीर बीमारी से बचाव तो होगा ही अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी कम रहेगी।

टीकाकरण कराने वालों को मास्क पहनने, फिजिकल दूरी रखने जैसे दिशा-निर्देशों का नियमानुसार अमल करते हुए कम खतरा रहेगा। टीका लगवाने वाले लोग यात्रा करने के साथ ही सार्वजनिक सेंटर्स पर बाल-नाखून कटवाने में भी समर्थ होंगे।

सबसे बड़ी बात यह कि टीकाकरण कराने वाले लोग निष्फिक्र भाव से कार्य स्थल पर काम करने जा सकेंगे। टीकाकरण कराने वाले दादा-दादी अपने गैर टीकाकृत बच्चों को आलिंगन में भर सकेंगे। हालांकि यह सब विशिष्ट शर्तों की पूर्ति के उपरांत संभव होगा।

ऐसे में टीकाकरण कराने और वंचित सभी लोगों के लिए यही एकमात्र कीमती सलाह है कि मास्क पहनें, एक-दूसरे से निर्धारित दूरी बनाए रखें। सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन कर देश एवं समाज हित में सहयोग प्रदान करें और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। टीका आपकी रक्षा करता है इसलिए नियमानुसार टीका लगवाएं।

डिस्क्लेमर – आर्टिकल प्रचलित मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें शीर्षक-उप शीर्षक और संबंधित अतिरिक्त प्रचलित जानकारी जोड़ी गई हैं। इस आर्टिकल में प्रकाशित तथ्यों की जिम्मेदारी राज एक्सप्रेस की नहीं होगी।

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